छत्तीसगढ़ के 26 साल: विकास का जश्न या मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ अपने गठन के 26 वर्ष पूरे कर चुका है। राज्य स्थापना दिवस पर भले ही जश्न का माहौल हो, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इसके बिल्कुल विपरीत तस्वीर पेश करती है। दो दशक से अधिक का लंबा समय बीत जाने के बाद भी प्रदेश के नागरिक शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं।
जांजगीर-चांपा क्षेत्र से राकेश साहू की रिपोर्ट के अनुसार, विकास के दावों और कागज़ी योजनाओं के बीच आम आदमी का जीवन आज भी कई तरह की परेशानियों से घिरा हुआ है। आइए जानते हैं राज्य की प्रमुख समस्याओं का जायजा:
1. बदहाल सड़कें और कृषि में तबदील होते मार्ग -
राज्यभर में सड़कों का जाल बिछाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन राजधानी से लेकर ग्रामीण इलाकों तक सड़कों की हालत दयनीय है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी कई सड़कें रखरखाव के अभाव में जर्जर हो चुकी हैं। स्थिति यह है कि कई मार्ग खेतों में तब्दील हो चुके हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों के लोगों को आवागमन में भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। मरम्मत के अभाव में विकास की गति पर भी ब्रेक लग गया है।
2. शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर सवाल -
प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को एक व्यापार की तरह संचालित किए जाने के आरोप लग रहे हैं। युक्तिकरण के नाम पर कई स्कूलों के बंद होने और दूसरी तरफ शराब की दुकानों के संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा, व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) और सीजीपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने और परीक्षाओं के रद्द होने से युवाओं का भविष्य अधर में लटका है। रोज़गार के अवसरों की कमी और परीक्षाओं में अनियमितता के कारण युवा वर्ग हताशा के दौर से गुजर रहा है।
3. चरमराई स्वास्थ्य सेवाएं और डॉक्टरों की लापरवाही -
स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। ग्रामीण अंचलों में नियुक्त डॉक्टर मुख्यालय पर रहने के बजाय आवाजाही पर निर्भर रहते हैं, जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। डॉक्टरों की अनुपस्थिति और लापरवाही के कारण कई बार प्रसूता महिलाओं और गंभीर मरीजों की जान तक चली जाती है। इसके अलावा, अस्पतालों में साफ-सफाई की कमी और स्टाफ के अभाव से मरीज़ों को संक्रमण का खतरा भी बना रहता है।
4. पेयजल संकट और जल जीवन मिशन की स्थिति -
छत्तीसगढ़ के कई सुदूर अंचल और ग्रामीण इलाकों में आज भी शुद्ध पेयजल एक बड़ी चुनौती है। जल जीवन मिशन के तमाम दावों के बावजूद ज़मीन पर पानी की आपूर्ति सुचारू रूप से नहीं हो पा रही है। गर्मी के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है, जहाँ आज भी ग्रामीणों को मजबूरी में नदी-नालों और तालाबों का दूषित पानी पीने के लिए विवश होना पड़ता है।
5. आवास योजनाओं में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक खामियां -
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पारदर्शिता की कमी साफ देखी जा रही है। पात्र हितग्राही आज भी पक्के मकान के लिए दर-दर भटक रहे हैं, जबकि कई जगहों पर प्रशासनिक लापरवाही के चलते एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम पर आवास आवंटित होने की शिकायतें सामने आती हैं। आज भी हज़ारों परिवार कच्चे मकानों में जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
निष्कर्ष: 26 वर्षों का यह सफर छत्तीसगढ़ के लिए आत्ममुग्ध होने का नहीं, बल्कि आत्ममंथन करने का समय है। राजनीतिक खींचतान और प्रशासनिक उदासीनता के चलते विकास की गति प्रभावित हो रही है, जिसका खामियाज़ा सीधे तौर पर प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।






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