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बेटी सीमा कुमारी ने एशियन गेम्स 2026 में जीता कांस्य पदक....

23 hours ago
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

चंबा: हिमाचल प्रदेश की एथलीट सीमा कुमारी ने एशियन गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। सीमा का पदक तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। पिता के निधन के बाद परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी मां ने बेटी के खेल के सपने को टूटने नहीं दिया। मां ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तक तुड़वाई और सीमा को बेहतर प्रशिक्षण के लिए हॉस्टल भेजा। सीमा हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से ताल्लुक रखती हैं। पहाड़ी इलाके से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के दौरान उन्हें सीमित संसाधनों के बीच अभ्यास करना पड़ा। परिवार में पिता का साया उठने के बाद परिस्थितियां और कठिन हो गईं। ऐसे समय में उनकी मां ने सीमा की जिम्मेदारी संभाली और खेल जारी रखने के लिए उनका हौसला बढ़ाया।


पिता के निधन के बाद सीमा के सामने खेल जारी रखने की चुनौती थी। प्रशिक्षण और हॉस्टल में रहने के लिए पैसे की जरूरत थी। इस दौरान उनकी मां ने आर्थिक मुश्किलों के बावजूद बेटी के खेल को प्राथमिकता दी। उन्होंने जमा की गई FD तुड़वाकर सीमा को हॉस्टल भेजने का फैसला किया, ताकि प्रशिक्षण में किसी तरह की बाधा न आए। मां के इसी सहयोग और सीमा की मेहनत का परिणाम एशियन गेम्स में कांस्य पदक के रूप में सामने आया। सीमा ने प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। पदक जीतने के बाद उनके परिवार और हिमाचल प्रदेश में खुशी का माहौल है।


सीमा का खेल सफर स्कूल के दिनों से आगे बढ़ा। दौड़ में उनकी प्रतिभा सामने आने के बाद उन्होंने एथलेटिक्स को गंभीरता से लिया। आगे चलकर बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाओं के लिए उन्हें घर से दूर रहना पड़ा। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद उनकी मां ने प्रशिक्षण को जारी रखने में पूरा सहयोग दिया। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता तक पहुंचने के लिए सीमा ने लगातार अभ्यास किया। एथलेटिक्स में फिटनेस बनाए रखने के साथ नियमित प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन बेहद महत्वपूर्ण होता है। सीमा ने इन्हीं चुनौतियों के बीच अपना अभ्यास जारी रखा और राष्ट्रीय स्तर से आगे बढ़ते हुए भारतीय टीम में जगह बनाई।


एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतना सीमा के करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गया है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए पदक हासिल करने के साथ उन्होंने हिमाचल प्रदेश के चंबा का नाम भी खेल जगत में आगे बढ़ाया है। सीमा की उपलब्धि के पीछे उनकी मां के संघर्ष की भी अहम भूमिका रही। पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभालने के साथ उन्होंने बेटी की खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने का फैसला किया। आर्थिक संकट के बावजूद सीमा की ट्रेनिंग नहीं रुकने दी। FD तुड़वाकर हॉस्टल भेजने का फैसला भी इसी प्रयास का हिस्सा था। सीमा कुमारी का यह सफर परिवार के सहयोग और खिलाड़ी की लगातार मेहनत की कहानी है। घर की कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने खेल नहीं छोड़ा और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचीं। एशियन गेम्स का कांस्य पदक उनकी वर्षों की मेहनत और उनकी मां के सहयोग का परिणाम बनकर सामने आया है।

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