google.com, pub-3310156774694367, DIRECT, f08c47fec0942fa0
top of page
WhatsApp Image 2025-09-10 at 15.54_edite
ADN FILMS POSTER

BREAKING ADN NEWS

WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.10.10.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (2).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31 (1).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (1).jpeg

टीबी के खिलाफ लड़ाई में आगे आएं, बनें किसी मरीज की उम्मीद....

Aug 6
3 min read
  • जशपुर में 19 विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) मरीजों सहित 60 टीबी रोगियों को गोद लेकर पोषण सहायता प्रदान कर रहे हैं निरंजन |

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से:-

रायपुर 06 अगस्त 2026 टीबी केवल एक बीमारी नहीं है। यह गरीबी, कुपोषण और सामाजिक उपेक्षा से जुड़ी ऐसी चुनौती है, जो हर साल हजारों परिवारों को आर्थिक और मानसिक संकट में धकेल देती है। जब कोई व्यक्ति टीबी से ग्रसित होता है, तब उसके सामने केवल दवा लेने की चुनौती नहीं होती, बल्कि पौष्टिक भोजन जुटाने, नियमित उपचार जारी रखने और सामाजिक भेदभाव से लड़ने जैसी अनेक कठिनाइयाँ भी खड़ी हो जाती हैं। यही कारण है कि देशव्यापी प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान में "निक्षय मित्र" की अवधारणा को विशेष महत्व दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी के उपचार में दवा जितनी आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है पर्याप्त पोषण। लेकिन दूरस्थ और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। कई मरीज केवल इसलिए उपचार बीच में छोड़ देते हैं क्योंकि उनके पास पोषणयुक्त भोजन की व्यवस्था नहीं होती। ऐसे समय में निक्षय मित्र न केवल पोषण सहायता प्रदान करते हैं, बल्कि मरीजों के मनोबल को भी मजबूत बनाते हैं।


छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। जिले के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) के बीच स्वास्थ्य एवं सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में कार्य करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यरत जिला डाटा प्रबंधक निरंजन प्रसाद गुप्ता ने अक्टूबर 2024 से निक्षय मित्र के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने न केवल 19 पीवीटीजी समुदाय के टीबी मरीजों को गोद लिया, बल्कि जिले के कुल 60 टीबी मरीजों को नियमित रूप से पोषण आहार एवं आवश्यक सहयोग प्रदान कर उपचार की राह में उनका साथ निभाया।


जशपुर के पहाड़ी कोरवा और बिरहोर जैसे विशेष पिछड़ी जनजातीय समुदायों में टीबी की रोकथाम, समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित होने के कारण मरीज अक्सर उपचार में देरी कर देते हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए मरीजों को पोषण सहायता, स्वास्थ्य परामर्श और निरंतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया, जिससे उपचार की निरंतरता बनी रही।


निरंजन गुप्ता की पहल केवल पोषण किट तक सीमित नहीं रही। उन्होंने घर-घर पहुंचकर मरीजों और उनके परिजनों को टीबी के लक्षणों, नियमित दवा सेवन, संक्रमण से बचाव तथा उपचार पूरा करने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस सतत संवाद का सकारात्मक प्रभाव यह हुआ कि समुदाय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास बढ़ा और लोग स्वयं स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने लगे।


टीबी के खिलाफ लड़ाई में दवा और निदान जितने महत्वपूर्ण हैं, उतना ही महत्वपूर्ण है पोषण और सामाजिक सहयोग। कुपोषण और टीबी का संबंध एक दुष्चक्र की तरह है कुपोषण से बीमारी बढ़ती है और बीमारी से कुपोषण। ऐसे में निक्षय मित्र द्वारा दिया गया पोषण सहयोग मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और उपचार को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन उल्लेखनीय प्रयासों के लिए निरंजन गुप्ता को दिसंबर 2024 में राज्य स्तरीय निक्षय मित्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया।


टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य नहीं है। यह समाज के हर उस व्यक्ति का दायित्व है जो किसी जरूरतमंद के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। जशपुर की यह पहल बताती है कि एक व्यक्ति भी यदि संवेदनशीलता के साथ आगे आए, तो वह दर्जनों परिवारों के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है। आज आवश्यकता है कि अधिक से अधिक नागरिक, संस्थाएं और सामाजिक संगठन निक्षय मित्र बनकर इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ें, ताकि कोई भी टीबी मरीज केवल संसाधनों के अभाव में उपचार से वंचित न रहे।

Comments


© 2018 by Anis lala dani. Proudly created with breakingadnnews.com

  • Subscribe Channale
bottom of page
naver-site-verification: navere8d42c0359e3e135363406d5b6093c27.html