छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा कदम: खुद के ही बच्चे के अपहरण मामले में फंसी मां....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अनोखे और गंभीर मामले में संज्ञान लेते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अपने ही पांच साल के बच्चे को लेकर दर्ज किए गए अपहरण के मामले में हाईकोर्ट ने फिलहाल आगे की सभी आपराधिक प्रक्रियाओं पर रोक लगा दी है। अदालत ने पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा है कि आखिर जैविक मां के खिलाफ इस तरह का संगीन मामला किन आधारों पर दर्ज किया गया।
मामले के अनुसार, बिलासपुर के मंगला की रहने वाली रोशनी सोनी ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि वह बच्चे की प्राकृतिक और जैविक मां है, ऐसे में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(2) के तहत अपहरण का मामला कानूनी रूप से नहीं बनता।
पुलिस और प्रशासन से मांगा गया जवाब -
सुनवाई के दौरान राज्य शासन के पक्ष ने कोर्ट को बताया कि मां ने स्वयं बच्चे को शिकायतकर्ता आकाश सर्वगोड को सौंपा था। हालांकि, बाद में विवाद उभरने पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसका याचिकाकर्ता द्वारा विरोध किया गया।
मामلا की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास और जस्टिस सुधीर कुमार की बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को केस डायरी पेश करने का निर्देश देने के साथ ही संबंधित पुलिस अधिकारी और हेड कांस्टेबल संगीता नेताम व शिकायतकर्ता आकाश को नोटिस जारी किया है।
आगे की कार्यवाही स्थगित -
अदालत ने सरकंडा थाने की एफआईआर, चार्जशीट और न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के यहां लंबित मामले की अगली सुनवाई तक सभी अग्रिम कार्रवाइयों पर रोक लगा दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी। हालांकि, अदालत ने फिलहाल एफआईआर को पूरी तरह से निरस्त नहीं किया है, लेकिन पुलिस को पूरी स्थिति साफ करने का सख्त निर्देश दिया है।






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