google.com, pub-3310156774694367, DIRECT, f08c47fec0942fa0
top of page
WhatsApp Image 2025-09-10 at 15.54_edite
ADN FILMS POSTER

BREAKING ADN NEWS

WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.10.10.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (2).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31 (1).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (1).jpeg

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: विदेशी MBBS डॉक्टरों को नहीं मिलेगी 1 लाख फीस वापसी, पुराना स्टाइपेंड भी खारिज...

3 hours ago
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

बिलासपुर न्यायक्षेत्र में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विदेश से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर लौटे मेडिकल ग्रेजुएट्स को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में इंटर्नशिप करने वाले विदेशी डॉक्टरों द्वारा जमा कराई गई एक लाख रुपये की फीस वापस नहीं की जाएगी। इसके अलावा, अगस्त 2022 से पहले के बकाये स्टाइपेंड की मांग को भी न्यायालय ने नामंजूर कर दिया है।


जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं ने अपनी विदेशी डिग्रियां 18 नवंबर 2021 से पहले प्राप्त कर ली थीं। इस वजह से वे राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के नए प्रावधानों का हवाला देकर पिछली अवधि के लाभ के हकदार नहीं हैं।


क्या था पूरा मामला और कानूनी पेंच ?

विदेशी विश्वविद्यालयों से एमबीबीएस पूरा करने के बाद इन चिकित्सकों ने सिम्स में अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप पूरी की थी। इस दौरान उनसे एक-एक लाख रुपये का शुल्क लिया गया था। डॉक्टरों का तर्क था कि एनएमसी के वर्ष 2022 के परिपत्रों और निर्देशों के मुताबिक, इस वर्ग से इंटर्नशिप फीस नहीं ली जानी चाहिए और भारतीय चिकित्सा संस्थानों के छात्रों के समान भत्ता मिलना चाहिए।


चिकित्सकों का कहना था कि राज्य के चिकित्सा शिक्षा संचालनालय द्वारा अगस्त 2022 में आदेश जारी होने के बाद से उन्हें नियमित भत्ता तो मिलने लगा, लेकिन पंजीकरण से लेकर अगस्त 2022 तक की अंतर राशि का भुगतान रोक दिया गया था। इसी पुराने बकाये और फीस वापसी के लिए हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं।


शासन का पक्ष और अदालत का निर्णय -

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए बताया गया कि संबंधित चिकित्सकों ने यह फीस वर्ष 2015 में ही जमा कर दी थी। शासन स्तर पर लिए गए निर्णय के अनुसार, नियम लागू होने की तिथि से पहले प्राप्त शुल्क को लौटाया नहीं जा सकता।


अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि एनएमसी के विनियम 18 नवंबर 2021 से प्रभावी हुए हैं। चूंकि याचिकाकर्ताओं की डिग्री इस तारीख से पहले की है और वे पिछली तिथि से लाभ का कोई ठोस वैधानिक प्रावधान पेश नहीं कर सके, इसलिए अदालत ने तीनों याचिकाएं खारिज कर दीं। इस फैसले से साफ हो गया है कि पुरानी अवधि के भत्ते और फीस वापसी की मांग कानूनी कसौटी पर खरी नहीं उतरी है।


  • मामला: सिम्स बिलासपुर में विदेशी एमबीबीएस डॉक्टरों की इंटर्नशिप फीस और पुराना स्टाइपेंड विवाद।

  • निर्णय: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकल पीठ द्वारा याचिकाएं खारिज।

  • मुख्य कारण: एनएमसी नियमों की प्रभावी तिथि (18 नवंबर 2021) से पहले डिग्री प्राप्त होना।

Comments


© 2018 by Anis lala dani. Proudly created with breakingadnnews.com

  • Subscribe Channale
bottom of page
naver-site-verification: navere8d42c0359e3e135363406d5b6093c27.html