छत्तीसगढ़ के कलाकारों का राष्ट्रीय मंच पर डंका: आनन्द पाण्डेय और घनश्याम साहू को 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार'....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने दोनों कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी की कला और संस्कृति को राष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाने वाले ये रचनाकार प्रदेश की अमूल्य थाती हैं।
रायपुर, 20 अक्टूबर 2026 / छत्तीसगढ़ की रंगमंचीय और सांस्कृतिक परंपरा के लिए यह पल बेहद गौरव बढ़ाने वाला है। संगीत नाटक अकादमी की ओर से देश के प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार के लिए प्रदेश की दो बड़ी प्रतिभाओं का चयन किया गया है। आदिवासी बहुल जशपुर जिले में अभिनय की अलख जगाने वाले आनन्द पाण्डेय और सारंगढ़ से नाट्य एवं छत्तीसगढ़ी फिल्मों की पटकथा लिखने वाले घनश्याम साहू को यह राष्ट्रीय सम्मान मिला है। इस उपलब्धि से पूरे प्रदेश का कला जगत गर्व महसूस कर रहा है।

वनांचलों और छोटे शहरों से निकलकर राष्ट्रीय फलक पर धाक जमाने वाले इन रचनाकारों ने साबित कर दिया है कि कला और मेहनत किसी दायरे की मोहताज नहीं होती। लगातार साधना और सृजन के दम पर छत्तीसगढ़ के कलाकार अब देश के सांस्कृतिक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
जशपुर के आनन्द पाण्डेय ने अभिनय से खींचा ध्यान -
सरगुजा अंचल के जशपुर जैसे दूरस्थ क्षेत्र में रहकर रंगमंच को जिंदा रखने और उसे समृद्ध बनाने वाले आनन्द पाण्डेय को बेहतरीन अभिनय के लिए इस राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया है। उनका यह सफर उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल है जो संसाधन कम होने के बावजूद अपने सपनों को सच करना चाहते हैं। उनका यह सम्मान आदिवासी अंचलों में छिपी कला को एक नई उड़ान देने का काम करेगा।
सारंगढ़ के घनश्याम साहू ने सिनेमा और नाटक को दी नई दिशा -
सारंगढ़ से ताल्लुक रखने वाले घनश्याम साहू ने अपनी लेखनी के दम पर छत्तीसगढ़ी सिनेमा और नाट्य जगत में खास जगह बनाई है। नाटकों और फिल्मों में उनकी दमदार पटकथा और संवाद अदायगी ने हमेशा दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा है। भाषा और समाज से जुड़े विषयों को सहजता से पर्दे और मंच पर उतारने वाले घनश्याम को मिला यह सम्मान प्रदेश के तमाम लेखकों और साहित्यकारों के लिए बड़े उत्साह की बात है।
सांस्कृतिक विरासत का बढ़ता दायरा -
देशभर के युवा कलाकारों को उनकी कला के लिए प्रोत्साहित करने वाला संगीत नाटक अकादमी का यह पुरस्कार बेहद अहम माना जाता है। छत्तीसगढ़ में लोककला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की पुरानी परंपरा रही है। यहां की जीवनशैली और बोलियां कलाकारों को नया रचने की भरपूर छूट देती हैं। जब यहां के कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी बड़ी सफलता मिलती है, तो नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जुड़कर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
संस्कृति मंत्री ने की हौसला अफजाई -
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने दोनों कलाकारों को उनकी इस शानदार कामयाबी पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरा शुरू से ही सृजन और कला के मामले में धनी रही है। सुदूर अंचलों के कलाकारों का इस तरह देश के बड़े मंच पर सम्मानित होना पूरे राज्य के लिए फक्र की बात है।
मंत्री ने आगे कहा कि आनन्द पाण्डेय और घनश्याम साहू ने अपनी मेहनत से यह दिखा दिया है कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक क्षमता में कितनी ताकत है। सरकार ऐसे कलाकारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है और उनकी यह सफलता आने वाले समय में दूसरों को भी प्रेरित करती रहेगी। यह सम्मान सिर्फ दो व्यक्तियों की जीत नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की कलात्मक सोच और साधना का सम्मान है।






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