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संसद में गूंजा छत्तीसगढ़ का भारतनेट मुद्दा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ₹3,942 करोड़ के नए फंड पर मांगी स्वतंत्र निगरानी समिति.....

Jul 29
2 min read

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से:-

रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद के नियम 377 के तहत नोटिस देकर छत्तीसगढ़ में भारतनेट परियोजना के क्रियान्वयन में हुई गंभीर विफलताओं का मामला केंद्र सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि ग्रामीण भारत को ई-गवर्नेस, ई-हेल्थ और ई-एजुकेशन से जोड़ने के लिए बनी इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ आज भी छत्तीसगढ़ के लगभग 20 हजार गांवों की करोड़ों आबादी को नहीं मिल पा रहा है।


अपने पत्र में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने चिंताजनक आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि परियोजना के पहले चरण के तहत राज्य की 4,114 ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई थी, लेकिन इनमें से केवल 595 पंचायतों में ही सेवा चालू है और 3,519 ग्राम पंचायतों में कनेक्शन पूरी तरह बंद पड़े हैं। वहीं दूसरे चरण की स्थिति और भी खराब है, जहां 1,754 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से 5,540 ग्राम पंचायतों में केबल बिछाने के बावजूद आज एक भी ग्राम पंचायत में इंटरनेट सेवा काम नहीं कर रही है।


सांसद ने आगे बताया कि चिप्स छत्तीसगढ़ और मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्टर टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के बीच बिलों के भुगतान को लेकर गहरा विवाद चल रहा है और मामला कोर्ट में लंबित है। इसके चलते 1,754 करोड़ रुपये का बुनियादी ढांचा पूरी तरह बेकार पड़ा हुआ है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा संशोधित भारतनेट प्रोग्राम के तहत छत्तीसगढ़ के लिए हाल ही में मंजूर किए गए 3,942 करोड़ रुपये के नए बजट पर भी सवाल उठाए और कहा कि पहले और दूसरे चरण की बुनियादी खामियों को सुधारे बिना इतना बड़ा फंड जारी करना बेहद चिंताजनक है।


बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार से मांग की है कि छत्तीसगढ़ में भारतनेट योजना की कार्यप्रणाली की जांच और पारदर्शी संचालन के लिए तत्काल एक स्वतंत्र निगरानी समिति का गठन किया जाए। यह समिति पिछले चरणों की विफलताओं की जांच करे, एजेंसियों के बीच जारी विवादों को सुलझाए और नए मंजूर हुए 3,942 करोड़ रुपये के फंड के सही इस्तेमाल तथा रखरखाव पर कड़ी नजर रखे ताकि इसका वास्तविक लाभ ग्रामीण जनता तक पहुंच सके।


बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि, "देश के गांव ही देश का भविष्य हैं, अतः सभी ग्रामीणवासियों को इस मूलभूत डिजिटल सुविधा की पहुंच होना अत्यंत आवश्यक है। बृजमोहन ने कहा कि, भारतनेट परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'डिजिटल इंडिया' की भावना को साकार करने की आधारशिला है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि हमारी ग्रामीण आबादी ई-गवर्नेंस, शिक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण का लाभ उठाए, एक आवश्यक निगरानी समिति का गठन करना बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है। इस समिति को पुराने कार्यों की समीक्षा करनी चाहिए और नए आवंटित फंड का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए।"


भारतनेट योजना क्या है और इसके क्या लाभ हैं?

भारतनेट पहल को ग्रामीण कनेक्टिविटी को बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया है। बुनियादी ढांचे के ठप होने के कारण, छत्तीसगढ़ के ग्रामीण नागरिक वर्तमान में विशेष रूप से उनके लिए डिज़ाइन किए गए अत्यधिक लाभकारी पैकेजों से वंचित हैं। योजना के तहत, बीएसएनएल (BSNL) मात्र ₹259/माह पर एक बेहद किफायती विशेष ग्रामीण योजना (Special Rural Plan) प्रदान करता है |

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