छत्तीसगढ़: व्हाट्सएप पर लीक हुए तिमाही परीक्षा के पेपर, कांग्रेस ने मांगा शिक्षा मंत्री का इस्तीफा....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर: छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। प्राथमिक और मिडिल स्कूलों की तिमाही परीक्षा के प्रश्नपत्र व्हाट्सएप पर लीक होने और परीक्षा से एक दिन पहले ही फोटोकॉपी की दुकानों पर बिकने को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस ने इसे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए राज्य के शिक्षा मंत्री से तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि साय सरकार में छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से वेंटिलेटर पर आ चुकी है। उन्होंने कहा, "जिस परीक्षा पत्र को अत्यंत गोपनीय और सीलबंद लिफाफे में स्कूलों तक पहुंचना चाहिए था, वह परीक्षा से एक दिन पहले व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल हो रहा है और बाजार में खुलेआम बिक रहा है।" कांग्रेस ने इसे केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि गरीब और ग्रामीण बच्चों के भविष्य के साथ एक संगीन अपराध करार दिया है।
'स्मार्ट' शिक्षा के दावों पर सवाल -
सुशील आनंद शुक्ला ने राज्य सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा सरकार शिक्षा व्यवस्था को ‘स्मार्ट’ बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से खोखला कर दिया गया है। इससे परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता खत्म हो गई है। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने 'स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय' शुरू कर बच्चों को निःशुल्क और पारदर्शी विश्वस्तरीय शिक्षा दी थी। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार न तो खुद प्रश्नपत्र भेज पा रही है और न ही स्कूलों को पेपर प्रिंटिंग के लिए फंड दे रही है।
"पेपर लीक ही बन गई है गारंटी" -
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में लगातार हो रहे पेपर लीक अब सरकार की पहचान बन गए हैं। संचार प्रमुख ने याद दिलाया कि इससे पहले 14 मार्च 2026 को होने वाला 12वीं का हिंदी का पेपर भी 13 मार्च को टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर लीक हो गया था। इसके अलावा हाल ही में कृषि विश्वविद्यालय के पेपर लीक और 2024-2025 की पीएससी भर्ती परीक्षाओं के मूल्यांकन (Valuation) में हुई गड़बड़ियों का भी मुद्दा उठाया गया।
कांग्रेस ने राज्य सरकार से सवाल किया है कि क्या पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराकर दोषी अधिकारियों और विभागीय मंत्री पर कार्रवाई की जाएगी या इसे भी ‘सामान्य बात’ कहकर दबा दिया जाएगा? पार्टी ने कहा कि इस तरह की धांधली से पूरी ईमानदारी से पढ़ाई करने वाले लाखों छात्र-छात्राओं का भारी नुकसान हो रहा है।






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