छत्तीसगढ़ : AI सेमीकंडक्टर और ग्रीन स्टील का हब बनने की तैयारी...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
रायपुर। छत्तीसगढ़ अब केवल खदानों, कोयले और पारंपरिक स्टील प्लांट वाले राज्य की अपनी पुरानी छवि को पीछे छोड़ रहा है। राज्य में अब एक नई औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का पूरा फोकस अब सिर्फ कच्चे माल के दोहन से हटकर वैल्यू-एडेड और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग पर आ गया है। इस नई रणनीति के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण, फार्मा और 'ग्रीन स्टील' जैसे आधुनिक सेक्टर्स को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नई और मजबूत दिशा देंगे।
निवेश की आंधी: 18 महीने में 8 लाख करोड़ के प्रस्ताव -
राज्य की नई औद्योगिक नीति का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। पिछले डेढ़ साल के भीतर प्रदेश में करीब 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं। अनुमान है कि इन प्रोजेक्ट्स के धरातल पर उतरने से डेढ़ लाख से ज्यादा युवाओं को सीधा रोजगार मिलेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि निवेशकों का रुझान अब पारंपरिक भारी उद्योगों से हटकर डेटा सेंटर, टेक्सटाइल, एग्रो-प्रोसेसिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स की तरफ बढ़ा है। नवा रायपुर में AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए 18,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव और राजनांदगांव में 'इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर' (EMC 2.0) के लिए 3 हजार करोड़ की मंजूरी इस बदलते दौर का सबसे बड़ा प्रमाण हैं।
स्टील का नया अवतार: अब 'ग्रीन स्टील' पर जोर -
देश के प्रमुख स्टील उत्पादक राज्यों में शुमार छत्तीसगढ़ अब भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 'ग्रीन स्टील' (पर्यावरण अनुकूल स्टील उत्पादन) की ओर कदम बढ़ा रहा है। हाल ही में हुए एक डायलॉग में ग्रीन स्टील सेक्टर में करीब 13,840 करोड़ रुपये के निवेश प्रतिबद्धताएं सामने आई हैं। इससे न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, बल्कि राज्य राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाएगा।
फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स में नई उड़ान -
छत्तीसगढ़ तेजी से राष्ट्रीय सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बन रहा है। फार्मा सेक्टर में पिछले कुछ महीनों में करीब 992 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें से 216 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स पर काम भी शुरू हो चुका है। राजनांदगांव का EMC 2.0 प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण और सहायक उद्योगों का नया गढ़ बनने जा रहा है।
बस्तर और सरगुजा: स्थानीय संसाधनों से रोजगार -
विकास की यह लहर केवल रायपुर या बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार ने बस्तर और सरगुजा जैसे वनांचल क्षेत्रों के लिए भी मास्टरप्लान तैयार किया है। यहाँ मौजूद प्रचुर वन संपदा और कृषि उत्पादों के स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) पर जोर दिया जा रहा है। इससे कच्चे माल के बजाय तैयार उत्पाद बाजार में जाएंगे, जिससे स्थानीय आदिवासियों और किसानों की आमदनी सीधे तौर पर बढ़ेगी।
निवेश को जमीन पर उतारने का 'सिंगल विंडो' प्लान -
इन भारी-भरकम निवेश प्रस्तावों को कागजों से निकालकर हकीकत में बदलने के लिए सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम और ऑनलाइन स्वीकृति प्रणाली को बेहद फास्ट कर दिया है। 100 करोड़ रुपये से बड़े प्रोजेक्ट्स को 'रेड कार्पेट' सुविधा देते हुए उनकी फाइलों को प्राथमिकता से क्लियर किया जा रहा है।
साफ है कि अपने प्रचुर खनिजों और मजबूत ऊर्जा बेस का इस्तेमाल करते हुए छत्तीसगढ़ अब भविष्य का हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की राह पर तेजी से दौड़ पड़ा है।






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