पूछता है छत्तीसगढ़......

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-
छत्तीसगढ़ की कुल आबादी 3.21,करोड़ 80 लाख 25 हज़ार परिवार (औसत एक परिवार 4 व्यक्ति)

पंजीकृत किसान 23 लाख के आस पास ,लगभग 5 लाख 75 हज़ार परिवार ( औसत एक परिवार 4 व्यक्ति )

बाक़ी 75 लाख परिवार का क्या दोष है, #पूछता_है_छत्तीसगढ़

जबकि अच्छी बारिश, बंपर फसल, ज्यादा मूल्य, एक एकड़ मे 20 क्विंटल खरीदने की स्कीम, सब तो किसान को मिल रहा, ऐसे मे अच्छी फसल के बाद भी वो अपनी लागत नहीं चुका रहा, और कर्ज माफी हो रही तो यह तो गलत परंपरा है. एक किसान को खाद मे सब्सिडी, बिजली बिल मे छूट, सोलर पम्प मे छूट, तमाम और योजनाएं, राशन से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य मे सहयोग , इतना सब होने के बाद भी अगर कर्ज माफी जैसे काम होने लगे तो सवको नौकरी, व्यापार छोड़ के किसान बन जाना चाहिए |

प्रदेश का व्यापारी वर्ग, नौकरी पेशा, और अन्य लोग क्यों ऐसे प्रलोभन से प्रताड़ित हो पूछता है प्रदेश ?
मुख्यमंत्री की सारी योजना क्या फोकस किसान है, नरवा, गरवा, गोबर गोठान जैसी योजनाओ के पैसे से जब खुशहाली आई है तो कर्ज माफी के लॉलीपॉप की जरूरत क्यों?
किसानों को आप उन्नतशील बनाने के बजाए क्यों इस तरह के निरुकुंश होने वाले कार्यों में उलझा रहे हो, आपके इस निर्णय से प्रदेश पर सीधे 8 हजार करोड़ रुपए का सीधा अतिरिक्त भार आयेगा, जिसे कर्ज लेकर ही पूरा करना है |
वर्तमान मे एक लाख करोड़ के आस पास राज्य का कर्ज है, अगर ऐसी घोसनाएँ होती रही तो प्रदेश का विकास नहीं होने वाला, वैसे भी सत्ता मे रहने के लिए ऐसे हथकंडे अपनाना पुरानी आदत है..
लोगो को सोचना है उन 75 लाख परिवारो को सोचना है की किसानो को इतना सब देने के बाद भी क्या मिलता है हमे, ना अच्छी सड़के, ना साफ सफाई, ना अच्छी कानून व्यवस्था, सरकारी अधिकारियों की प्रताड़ना, भ्रस्टाचार, और पार्टियों से तिरस्कार..
सोचिये और पूछीये की आपको क्या मिलना चाहिए |
आपका का वोट 🗳 बहुत कीमती है इस देश प्रदेश के लिये, निर्णय का समय है फैसला सोच समझ के ले l






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