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छत्तीसगढ़ में रिश्वत के गंभीर आरोपों पर दिल्ली की CBI अदालत सख्त.....

Aug 11
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ -

नई दिल्ली : छत्तीसगढ़ कैडर के 2022 बैच के एक ट्रेनी आईपीएस अधिकारी और दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने और लेने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि साइबर फ्रॉड से जुड़े एक मामले को निपटाने के एवज में यह रकम मांगी गई थी। मामला अब दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत तक पहुंच गया है। अदालत ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक से एक्शन टेकन रिपोर्ट यानी ATR मांगी है।


शिकायत में ट्रेनी आईपीएस अधिकारी राहुल बंसल, सहायक उप-निरीक्षक प्रवीण कुमार राठौर और कांस्टेबल अंशुल शर्मा को आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अदालत में कथित रिश्वत लेन-देन और आरोपियों के बीच हुई बातचीत से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी पेश किए गए हैं। इनमें वाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट और कॉल रिकॉर्डिंग शामिल होने का दावा किया गया है। अदालत ने इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों से अब तक की कार्रवाई का विवरण मांगा है।


शिकायत के मुताबिक, राहुल बंसल आईपीएस में चयन से पहले आयकर विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर काम कर चुके थे। आईपीएस प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में सिविल सर्विस पुलिस अधिकारी (CSP) के तौर पर हुई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी दौरान साइबर फ्रॉड से जुड़े एक मामले को निपटाने के लिए कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की मांग की गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, रकम का भुगतान एक बार में नहीं हुआ, बल्कि कथित तौर पर दो अलग-अलग किस्तों में किया गया। आरोप है कि मई 2026 में 50-50 लाख रुपये की दो किस्तों में कुल एक करोड़ रुपये का भुगतान हवाला चैनलों के माध्यम से किया गया। शिकायतकर्ता ने कथित लेन-देन से संबंधित जानकारी और आरोपियों के साथ हुई बातचीत के डिजिटल रिकॉर्ड अदालत के समक्ष रखे हैं।


मामले में पेश किए गए कथित डिजिटल साक्ष्यों में वाट्सऐप पर हुई बातचीत और कॉल रिकॉर्डिंग को प्रमुख बताया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन रिकॉर्डों से रिश्वत की कथित मांग और भुगतान से संबंधित बातचीत का पता चलता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और सत्यापन अभी महत्वपूर्ण है। अदालत के समक्ष रखे गए दस्तावेजों की वास्तविकता और उनकी कानूनी स्वीकार्यता का निर्धारण जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में होना है।


दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक और सीबीआई निदेशक से एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। ATR के जरिए यह जानकारी मांगी गई है कि शिकायत सामने आने के बाद संबंधित एजेंसियों और विभागों ने अब तक क्या कदम उठाए हैं। रिपोर्ट में जांच शुरू होने, किसी अधिकारी से पूछताछ किए जाने या किसी अन्य प्रशासनिक अथवा कानूनी कार्रवाई की स्थिति भी स्पष्ट हो सकती है। अदालत की ओर से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस और सीबीआई की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। दोनों एजेंसियों को अदालत के सामने यह बताना होगा कि शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई की गई है और मामले की प्रारंभिक जांच किस स्थिति में है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि साइबर फ्रॉड केस को खत्म या निपटाने के नाम पर आरोपी पुलिसकर्मियों की ओर से कथित तौर पर रकम की मांग की गई। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और पुलिस जांच की निष्पक्षता से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।


हालांकि फिलहाल आरोपों की सत्यता अदालत या जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगी। मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायतकर्ता ने केवल मौखिक आरोप लगाने के बजाय कथित डिजिटल साक्ष्य भी अदालत में प्रस्तुत किए हैं। अब इन साक्ष्यों की तकनीकी जांच, उनकी प्रमाणिकता और कथित लेन-देन से उनका संबंध जांच का प्रमुख हिस्सा हो सकता है। फिलहाल ट्रेनी आईपीएस राहुल बंसल और दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए गए आरोप न्यायिक और जांच प्रक्रिया के दायरे में हैं। अदालत द्वारा DGP और CBI निदेशक से ATR मांगे जाने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत पर विभागीय या आपराधिक जांच किस स्तर तक पहुंची है और आरोपों को लेकर संबंधित एजेंसियों ने क्या प्रारंभिक निष्कर्ष निकाले हैं।

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