भाजपा का 'सेवा संकल्प अभियान' बना फ्लॉप शो, सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग पर कांग्रेस का तीखा हमला...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर: भारतीय जनता पार्टी के बहुप्रचारित 'सेवा संकल्प अभियान' को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस पूरे आयोजन को प्रशासनिक तंत्र का विफल तमाशा करार दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार के दो दशक पूरे होने के जश्न के नाम पर सरकारी खजाने और मशीनरी का खुलकर दुरुपयोग किया गया, लेकिन धरातल पर यह अभियान पूरी तरह बेदम साबित हुआ।
जनता और कार्यकर्ताओं दोनों ने बनाई दूरी -
मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के इस आयोजन से आम जनता ने तो किनारा किया ही, साथ ही खुद भाजपा के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी कार्यक्रमों से नदारद नजर आए। जनता के बीच किसी भी तरह का उत्साह न दिखने पर अब सरकारी तंत्र पर दबाव बनाकर भीड़ जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकारी धन से टेंट, तंबू और साज-सज्जा के जरिए इवेंट तैयार किए जा रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि जनता महंगाई और बेरोजगारी के संकट से जूझ रही है।
शिक्षकों पर दबाव और प्रशासनिक तंत्र का बेजा इस्तेमाल -
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस सियासी आयोजन को सफल दिखाने के लिए अब कर्मचारियों को भी मोहरा बनाया जा रहा है। स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों पर दबाव डालकर रक्तदान जैसे आयोजनों में झोंका जा रहा है, जिससे शिक्षक वर्ग में भारी रोष व्याप्त है। कांग्रेस का कहना है कि यदि शासन के दावे वास्तव में जनहित से जुड़े होते, तो सरकार को रैलियां और भीड़ जुटाने के लिए प्रशासनिक हथकंडों का सहारा नहीं लेना पड़ता।
जनता को प्रचार नहीं, बुनियादी राहत की दरकार -
विपक्ष का कहना है कि देश में बढ़ता कर्ज, आसमान छूती महंगाई, रोजगार के घटते अवसर और बदहाल होती व्यवस्था ने सत्ता के विकास के दावों की पोल खोल दी है। आज किसान, युवा, महिलाएं और मध्यम वर्ग बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि सरकारी धन का उपयोग केवल राजनीतिक छवि चमकाने के लिए हो रहा है। कांग्रेस ने दो टूक शब्दों में चेताया है कि केवल विज्ञापनों, दिखावे और सरकारी दीयों से जनता का भरोसा हासिल नहीं किया जा सकता, क्योंकि आज की जनता को कोरे भाषणों की नहीं बल्कि ठोस राहत और विकास की आवश्यकता है।






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