रायपुर और नवा रायपुर के जैविक कचरे से तैयार होगी बायो गैस और जैविक खाद....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:- रायपुर: रायपुर में कचरे के बेहतर प्रबंधन और वैकल्पिक ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कम्प्रेस्ड बायो गैस प्लांट स्थापित करने की तैयारी चल रही है। इस परियोजना के लिए पहले ग्राम रावाभांटा में जमीन चिन्हित की गई थी, लेकिन अब इसे नवा रायपुर अटल नगर के ग्राम कुर्रु में स्थानांतरित कर दिया गया है। नगर निगम के मुताबिक, परियोजना को रद्द नहीं किया गया है, बल्कि इसके निर्माण स्थल में बदलाव किया गया है। प्रस्तावित संयंत्र में प्रतिदिन 100 से 150 टन जैविक कचरे का प्रसंस्करण कर गैस तैयार करने की योजना है। रायपुर शहर से निकलने वाले गीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करने और उससे उपयोगी ऊर्जा तैयार करने के उद्देश्य से यह परियोजना शुरू की है। इसके तहत घरेलू गीले कचरे, गोबर और कृषि अपशिष्ट का इस्तेमाल किया जाएगा।परियोजना के लिए पहले रावाभांटा में भूमि चिन्हित की गई थी। बाद में नवा रायपुर के कुर्रु गांव में जमीन आवंटित की गई। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि संयंत्र बनाने की योजना जारी है और केवल इसके स्थान में बदलाव किया गया है।
इस परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए रायपुर नगर निगम, छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (CBDA) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। समझौते के अनुसार, संयंत्र के निर्माण, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी BPCL संभालेगी। फिलहाल परियोजना स्थल पर बाउंड्री वॉल बनाने का काम चल रहा है। मुख्य संयंत्र के संचालन और रखरखाव के लिए एजेंसी का चयन कर कार्य आदेश भी जारी किया जा चुका है। इसके साथ ही प्लांट की ड्राइंग और डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित संयंत्र में रायपुर शहर, नवा रायपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से एकत्र किए जाने वाले जैविक कचरे का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें घरों से निकलने वाला गीला कचरा, पशुओं का गोबर और कृषि अवशेष शामिल होंगे।इन सामग्रियों को प्रसंस्कृत करके कम्प्रेस्ड बायो गैस (CBG) तैयार की जाएगी। इससे जैविक कचरे को उपयोगी ईंधन में बदलने का अवसर मिलेगा। गैस उत्पादन की प्रक्रिया के बाद बचने वाले जैविक पदार्थ से लिक्विड फर्मेंटेड मैन्योर (LFM) तैयार करने की भी योजना है। इस उत्पाद का इस्तेमाल खेतों में जैविक खाद के तौर पर किया जा सकेगा।
रायपुर नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार, शहर में प्रतिदिन करीब 750 टन ठोस कचरा निकलता है। मौजूदा अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था के तहत इससे प्रतिदिन लगभग 20 टन कम्पोस्ट खाद तैयार की जाती है। इसके अलावा करीब 200 टन आरडीएफ यानी कचरे से तैयार होने वाला ईंधन भी उत्पादित किया जाता है। नगर निगम के मुताबिक, तैयार कम्पोस्ट को फर्टिलाइजर कंपनियां खरीदती हैं, जबकि आरडीएफ को सीमेंट संयंत्रों में ईंधन के रूप में उपयोग के लिए भेजा जाता है। इस व्यवस्था के माध्यम से कचरे में मौजूद उपयोगी पदार्थों का दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है। नगर निगम का दावा है कि शहर से निकलने वाले कुल कचरे के लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्से का पुनः उपयोग किया जाता है। प्रसंस्करण योग्य नहीं होने वाले अवशिष्ट कचरे को वैज्ञानिक पद्धति से सेनेटरी लैंडफिल में रखा जाता है।इस व्यवस्था का उद्देश्य खुले में कचरा फेंकने की जरूरत को कम करना, उपयोगी संसाधनों को दोबारा इस्तेमाल में लाना और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को नियंत्रित करना है। प्रस्तावित बायो गैस प्लांट शुरू होने से जैविक कचरे के निपटान के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध हो सकेगा।
नगर निगम के अनुसार, कुर्रु गांव में परियोजना के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। निर्माण स्थल पर बाउंड्री वॉल बनाने का काम जारी है और संयंत्र की डिजाइन तैयार की जा रही है। संचालन एवं रखरखाव के लिए एजेंसी को कार्य आदेश भी दिया जा चुका है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मुख्य संयंत्र का निर्माण पूरा होने और व्यावसायिक स्तर पर गैस उत्पादन शुरू होने की निश्चित तारीख का उल्लेख नहीं किया गया है। कुर्रु में प्रस्तावित यह परियोजना कचरा प्रबंधन को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इसके जरिए जैविक अपशिष्ट को उपयोगी ईंधन में बदलने के साथ कृषि के लिए जैविक खाद तैयार करने की भी संभावना है। यदि संयंत्र निर्धारित क्षमता के अनुसार संचालित होता है, तो रायपुर, नवा रायपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से निकलने वाले जैविक कचरे के निपटान में मदद मिल सकती है। साथ ही वैकल्पिक ईंधन के उत्पादन और संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।






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