स्मार्ट मीटर और बिजली संकट पर बड़ा सवाल: हजारों करोड़ खर्च के बाद भी क्यों नहीं सुधरे हालात...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
प्रदेशभर में इन दिनों स्मार्ट मीटर के नाम पर आ रहे भारी-भरकम बिलों और लगातार हो रही बिजली कटौती से आम नागरिक परेशान हैं। इस बीच, केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेजों से सामने आया है कि छत्तीसगढ़ बिजली वितरण कंपनी के लिए आरडीएसएस योजना के अंतर्गत कुल ₹8,126 करोड़ स्वीकृत किए गए थे, जिसमें से करीब ₹1,285 करोड़ की राशि जारी और उपयोग की जा चुकी है।

अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने इस वित्तीय खर्च पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब इतनी बड़ी राशि बुनियादी ढांचे और मीटरिंग सुधार के नाम पर खर्च हो चुकी है, तो उसका मदवार ब्योरा और उपयोगिता प्रमाण-पत्र सार्वजनिक करने से क्यों बचा जा रहा है। आरटीआई के तहत जब इस खर्च का विस्तृत ब्योरा मांगा गया, तो तय समय सीमा में स्पष्ट जानकारी देने के बजाय मामले को टालने का प्रयास किया गया।
इस मामले में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के समक्ष प्रथम अपील दायर कर दी गई है और फंड के उपयोग की पूरी जानकारी व संविदाकारों की सूची पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने की मांग की गई है। चेतावनी दी गई है कि यदि उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिलती है और व्यवस्था में सुधार नहीं होता है, तो इस गंभीर मुद्दे को लेकर बिलासपुर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी।

स्मार्ट मीटर की मनमानी रीडिंग और दोगुने बिलों से जनता त्रस्त।
₹1,285 करोड़ खर्च होने के बावजूद मैदानी स्तर पर सुधार न होना।
केंद्रीय मंत्रालय में आरटीआई के तहत प्रथम अपील दर्ज।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने की चेतावनी।






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