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छत्तीसगढ़ में बढ़ी बैंक जमा और कर्ज की रफ्तार...

Oct 20
4 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

रायपुर :- छत्तीसगढ़ में बैंकिंग गतिविधियों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश के लोगों में बचत और सुरक्षित निवेश के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच बैंकों में जमा राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक बैंकिंग रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में 74,635.06 करोड़ रुपए बताई गई जमा राशि वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,10,204.48 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इस प्रकार तीन वर्षों में 35,569.42 करोड़ रुपए यानी करीब 47.66 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, इन आंकड़ों को प्रदेश के सभी बैंकों की कुल जमा राशि मानने से पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की आधिकारिक वेबसाइट पर मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ के बैंकों की कुल जमा राशि 3,44,147.10 करोड़ रुपए दर्ज है।


इसलिए 1.10 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा संभवतः किसी विशेष श्रेणी से जुड़ा हो सकता है।

बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, कोरोना महामारी के बाद लोगों के आर्थिक व्यवहार में बदलाव देखा गया है। अब बड़ी संख्या में लोग भविष्य की जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य संबंधी खर्च और आपात परिस्थितियों के लिए बचत को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसका असर बैंक खातों और सावधि जमा योजनाओं में बढ़ते निवेश के रूप में देखा जा रहा है। लोग नियमित बचत खातों के साथ-साथ फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी जैसी योजनाओं में भी पैसा जमा कर रहे हैं। बैंक अधिकारियों का मानना है कि सुरक्षित बचत के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि बैंकिंग कारोबार को विस्तार देने में मदद कर रही है।


बैंकों में जमा राशि बढ़ने की एक वजह निवेशकों की जोखिम से बचने की प्रवृत्ति भी मानी जा रही है। शेयर बाजार और अन्य निवेश विकल्पों में उतार-चढ़ाव के कारण कुछ निवेशक अपनी रकम को अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले साधनों में रखना पसंद कर रहे हैं। विशेष रूप से ऐसे लोग, जो निश्चित अवधि के लिए पैसा सुरक्षित रखना चाहते हैं, बैंक एफडी और नियमित बचत योजनाओं पर ध्यान दे रहे हैं। हालांकि, एफडी में मिलने वाला ब्याज बैंक, जमा अवधि और अन्य शर्तों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। बैंक जमा पर महंगाई का असर भी ध्यान में रखना जरूरी है।


छत्तीसगढ़ में बैंक खातों में जमा राशि बढ़ने के संभावित कारणों में सरकारी योजनाओं के माध्यम से हितग्राहियों तक पहुंचने वाली रकम भी शामिल है। प्रदेश सरकार की महतारी वंदन योजना के तहत पात्र महिलाओं के खातों में आर्थिक सहायता राशि भेजी जाती है। इसके अलावा धान से संबंधित सरकारी भुगतान, श्रम विभाग की योजनाएं और अन्य हितग्राहीमूलक कार्यक्रमों के माध्यम से भी लोगों के बैंक खातों में रकम पहुंचती है। केंद्र सरकार की अनेक योजनाओं में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के जरिए सीधे लाभार्थियों को भुगतान किया जाता है। जब इन योजनाओं से प्राप्त रकम का कुछ हिस्सा तत्काल नहीं निकाला जाता, तो वह बैंक खाते में जमा रहता है।


हालांकि, सरकारी योजनाओं से बैंक जमा राशि में कुल कितनी वृद्धि हुई है, इसका अलग से स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार का असर भी देखने को मिल रहा है। सरकारी योजनाओं से जुड़े भुगतान, बैंक खातों के उपयोग और डिजिटल लेनदेन में बढ़ोतरी के कारण ग्रामीण आबादी की बैंकिंग प्रणाली में भागीदारी बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान, श्रमिक, महिलाएं और स्वरोजगार से जुड़े लोग विभिन्न बैंकिंग सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के अनुसार, मार्च 2023 में छत्तीसगढ़ में बैंकों की 3,338 शाखाएं थीं।


मार्च 2026 तक यह संख्या बढ़कर 3,596 हो गई। इससे बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार की जानकारी मिलती है। बैंकों में जमा और कर्ज के आधिकारिक आंकड़े राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के सार्वजनिक आंकड़ों के अनुसार बैंकिंग कारोबार की स्थिति इस प्रकार रही है।


वित्त वर्ष के अंत में कुल बैंक जमा राशि-

  1. मार्च 2023 ₹2,37,871.84 करोड़ ₹1,71,173.57 करोड़

  2. मार्च 2024 ₹2,82,949.54 करोड़ ₹2,02,413.16 करोड़

  3. मार्च 2025 ₹3,10,684.30 करोड़ ₹2,34,123.90 करोड़

  4. मार्च 2026 ₹3,44,147.10 करोड़ ₹2,70,615.45 करोड़

  5. स्रोत: राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, छत्तीसगढ़, आधिकारिक आर्थिक संकेतक।


लोन कारोबार पर भी बैंकों का जोर छत्तीसगढ़ में बैंक जमा बढ़ने के साथ ऋण वितरण पर भी जोर दिया जा रहा है। बैंक होम लोन, वाहन लोन, एजुकेशन लोन और पर्सनल लोन जैसी सुविधाओं के लिए पात्र ग्राहकों से संपर्क कर रहे हैं। पहले से कर्ज लेने वाले ग्राहकों को उनकी पात्रता और बैंक की शर्तों के अनुसार टॉपअप लोन के प्रस्ताव भी दिए जा रहे हैं। कई निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक फोन, डिजिटल माध्यम और बैंक शाखाओं के जरिए ग्राहकों को उपलब्ध ऋण योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं।


बैंकों का प्रयास जमा संसाधनों के साथ ऋण कारोबार का भी विस्तार करना है। कर्ज वितरण में भी दर्ज की गई बढ़ोतरी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में मार्च 2023 के अंत में कुल बैंक ऋण 1,71,173.57 करोड़ रुपए था, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 2,70,615.45 करोड़ रुपए हो गया। इस अवधि में ऋण राशि में करीब 99,442 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में केवल बचत ही नहीं, बल्कि बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से कर्ज वितरण का आकार भी बढ़ा है। कृषि, सूक्ष्म और लघु उद्योग, आवास तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए ऋण उपलब्ध कराना बैंकों के प्रमुख कार्यों में शामिल है।


वित्त वर्ष 2026-27 में भी कर्ज बढ़ने की उम्मीद बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में ऋण वितरण का दायरा और बढ़ सकता है। होम लोन, वाहन लोन, एजुकेशन लोन और अन्य खुदरा ऋण योजनाओं के माध्यम से बैंक नए ग्राहकों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, नए वित्त वर्ष में वास्तविक ऋण वृद्धि का आकलन संबंधित अवधि के बैंकिंग आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकेगा। प्रदेश में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार, बचत की प्रवृत्ति और बढ़ते ऋण कारोबार को देखते हुए वित्तीय गतिविधियों में लगातार बदलाव सामने आ रहे हैं। #ChhattisgarhNews #BankingSector #BankDeposit #LoanGrowth #SLBC #FinancialGrowth #BankingADNNews


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