पारंपरिक तिनके से उम्मीद की नई उड़ान: धनेश्वरी ने कला को बनाया आर्थिक संबल.....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
रायपुर संभाग के जांजगीर-चंपा जिले के अंतर्गत आने वाले नवागढ़ ब्लॉक के अवरीद गांव की रहने वाली धनेश्वरी धीवर ने साबित कर दिया है कि मेहनत और कला के दम पर किसी भी परिस्थिति को बदला जा सकता है। फसल कटाई के बाद खेतों में बेकार समझे जाने वाले धान के पैरे को उन्होंने अपनी रचनात्मकता से नायाब कलाकृतियों में बदल दिया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और नाबार्ड के सहयोग से मिले प्रशिक्षण ने उनके इस हुनर को एक नया मुकाम दिया है, जिससे वे आज घर बैठे ही सम्मानजनक कमाई कर रही हैं।
शुरुआत में यह केवल एक शौक था, लेकिन सही मार्गदर्शन मिलने के बाद उन्होंने इसे स्वरोजगार का मुख्य जरिया बना लिया। आज वे घर के कामों को संभालते हुए खाली समय में खूबसूरत हस्तशिल्प तैयार कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनका खुद का आत्मविश्वास भी कई गुना बढ़ा है। अब उन्हें रोजगार की तलाश में घर से बाहर जाने की कोई मजबूरी नहीं है।
धनेश्वरी की सफलता यहीं नहीं रुकती, बल्कि वे अब अपने क्षेत्र की दूसरी महिलाओं और जरूरतमंदों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। उन्होंने खुद सीखने के बाद अब अन्य ग्रामीण साथियों को भी इस कला का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें। शासन की विभिन्न योजनाओं और महिला समूहों के सक्रिय सहयोग से ग्रामीण अंचलों में महिलाओं के जीवन में जो सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं, धनेश्वरी की यह कहानी उसका एक जीवंत और प्रेरणादायक उदाहरण है।






.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpg)




Comments