भारतीय ज्वैलर्स का कमाल, दुबई में बने दुनिया के सबसे भारी और विशाल सोने के झुमके...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
दुबई के स्वर्ण बाजार में भारतीय कारीगरी ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मशहूर ज्वैलरी ब्रांड जॉयअलुक्कास ने 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल करके दुनिया के सबसे भारी और आकार में सबसे बड़े झुमकों की जोड़ी तैयार की है, जिसने दो अलग-अलग गिनीज रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। इन विशालकाय झुमकों का कुल वजन 16.514 किलोग्राम है और इनकी लंबाई लगभग चार फीट तक पहुंचती है। इस अद्भुत कलाकृति को धरातल पर उतारने के लिए देश के 55 कुशल शिल्पकारों ने दिन-रात एक करते हुए कुल 5,840 घंटे की कड़ी मेहनत की है। पारंपरिक भारतीय आभूषण निर्माण शैली से रचे गए इन झुमकों ने वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन किया है।

दो अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज हुए विश्व रिकॉर्ड गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की आधिकारिक सूची में इस रचना को दो प्रमुख श्रेणियों में स्थान मिला है। पहला खिताब दुनिया की सबसे भारी सोने की बालियों की जोड़ी का है, जबकि दूसरा रिकॉर्ड सबसे बड़ी बालियों की जोड़ी के रूप में दर्ज हुआ है। दस्तावेजों के मुताबिक, इस भारी-भरकम सोने की जोड़ी का वजन पिछले सभी रिकॉर्ड्स से पांच गुना अधिक है। निर्माण प्रक्रिया पूरी होने के बाद दुबई में इसे सार्वजनिक मंच पर प्रदर्शित किया गया, जिसे देखने के लिए दुनियाभर के कला प्रेमी पहुंचे।
मयूर कला से प्रेरित डिजाइन और नामकरण इन अनूठे झुमकों को 'मयूर सहस्र' नाम दिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ एक हजार मोरों का समूह होता है। भारतीय संस्कृति में मोर को भव्यता और सुंदरता का प्रतीक माना जाता है, जिसकी झलक इन आभूषणों की बारीक नक्काशी में साफ दिखाई देती है। पारंपरिक घंटीनुमा आकृति और पंखों की कलात्मक बनावट इन्हें बेहद खास बनाती है। हालांकि अपने भारी वजन और करीब 68 सेंटीमीटर व्यास के कारण इन्हें सामान्य रूप से पहनना मुमकिन नहीं है, बल्कि इसे भारतीय शिल्पकला की उत्कृष्टता को प्रदर्शित करने के लिए विशेष रूप से गढ़ा गया है।
दुबई में हुआ भव्य अनावरण समारोह दुबई गोल्ड डिस्ट्रिक्ट स्थित मुख्य शोरूम में आयोजित एक शानदार कार्यक्रम के दौरान इन विशाल झुमकों से पर्दा उठाया गया। स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और उद्योग जगत के दिग्गजों की मौजूदगी में गिनीज संस्था की ओर से कंपनी को प्रमाण पत्र सौंपे गए। प्रबंधन से जुड़े प्रमुख लोगों ने इस ऐतिहासिक क्षण को भारतीय हुनर और कारीगरों की अटूट मेहनत को समर्पित किया। आम जनता और पर्यटकों के लिए इन झुमकों को शोरूम में स्थायी तौर पर प्रदर्शित किया गया है, ताकि लोग बिना किसी शुल्क के इस नायाब कला को नजदीक से निहार सकें।






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