google.com, pub-3310156774694367, DIRECT, f08c47fec0942fa0
top of page
WhatsApp Image 2025-09-10 at 15.54_edite
ADN FILMS POSTER

BREAKING ADN NEWS

WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.10.10.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (2).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31 (1).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (1).jpeg

रायगढ़ में विवादित जमीन पर जबरन निर्माण का आरोप...

6 hours ago
5 min read
  • न्यायालय में विचाराधीन मामले के बीच बाउंड्रीवॉल का खेल!!

  • पूंजीपतियों के रसूख तले दबे किसान के अधिकार, छातामुड़ा-बांजीपाली हल्का बॉर्डर पर करोड़ों की जमीन और शासकीय मद पर कब्जे की गहरी साजिश!

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

रायगढ़ :- तहसील कार्यालय के गलियारों में न्याय की गुहार लगाने पहुँचे पीड़ितों की आपबीती ने एक बार फिर राजस्व महकमे की कार्यप्रणाली और विवादित सीमांकन के खेल को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अदालत में मामला विचाराधीन है और अभी तक कोई अंतिम फैसला भी नहीं आया है, इसके बावजूद मौके पर बाहुबल और धनबल के दम पर जबरन निर्माण कार्य कराकर कब्जे की कोशिशें तेज़ हो गई हैं।

तहसील न्यायालय परिसर पहुँचे पीड़ित फत्तेचंद पटेल (गोटिया) और कैलाश आचार्य ने मीडिया के सामने खुलकर प्रशासनिक लापरवाही और रसूखदारों की मनमानी की पोल खोली। पीड़ितों का सीधा आरोप है कि विपक्षी नितेश अग्रवाल कानूनी प्रक्रियाओं की धज्जियाँ उड़ाते हुए किसान की पैतृक ज़मीन हड़पने की साज़िश रच रहे हैं। इतना ही नहीं, नेशनल हाईवे से लगी करोड़ों की बेशकीमती सरकारी ज़मीन को भी खुर्द-बुर्द करने का ताना-बाना बुना जा चुका है।

अदालत में कब्जा दिलाने की गुहार लेकिन मौके पर दबंगई से खींच दी दीवार।

तहसील परिसर में मीडिया से मुखातिब होते हुए फत्तेचंद पटेल ने बताया कि नितेश अग्रवाल ने जमीन पर कब्जा न मिलने का हवाला देकर तहसीलदार न्यायालय में परिवाद दायर किया था। इस आधार पर न्यायालय से फत्तेचंद पटेल और कैलाश आचार्य को नोटिस तामील कराया गया। नोटिस के बाद जब मामला विधिक प्रक्रिया के तहत न्यायालय के विचाराधीन है, तो स्वाभाविक तौर पर किसी भी पक्ष को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं होता। लेकिन इसके ठीक उलट, न्यायालय के फैसले का इंतजार किए बगैर जमीन पर एकाएक बाउंड्रीवॉल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। फत्तेचंद पटेल का स्पष्ट कहना है कि संबंधित भूमि उनकी वैध पैतृक संपत्ति है। जब विवाद न्यायालय की दहलीज पर लंबित है, तो आखिर किस आधार पर बलपूर्वक निर्माण कर कब्जा थोपने की कोशिश की जा रही है? क्या रसूखदारों के लिए राजस्व संहिता और अदालती कायदे-कानून कोई मायने नहीं रखते?

इसे सीमांकन कहें या सीमा उल्लंघन?

क्या आपने कभी सुना है कि एक खसरा नंबर दो अलग-अलग तहसील और दो अलग-अलग हल्का नंबरों में हो सकता है? बिल्कुल नहीं.. लेकिन ऐसा ही एक चौंकाने वाला इस विवादित भूमि की जुड़ा मामला सामने आया है। जिसमें सीमांकन के दौरान हाईवे से जुड़ी एक जमीन खसरा नंबर 155/2 का आधा हिस्सा छाता मुड़ा और आधा हिस्सा बंझिनपाली में स्थित होना पाया गया इसके ठीक बाजू में स्थित 155/1/ख की विवादित जमीन का तहसील न्यायालय में लंबित है। गलत सीमांकन की यहां किसान की जमीन दब रही है। अब पटेल ने सीमांकन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व में जिस सीमांकन का हवाला दिया जा रहा है, वह पूरी तरह से एकतरफा और जमीनी हकीकत से कोसों दूर था। जिस वक्त सीमांकन की औपचारिकता निभाई गई, उस समय चारों तरफ भारी बरसात, कीचड़, झाड़ियां और गहरे गड्ढों में पानी भरा हुआ था।

ऐसी विषम परिस्थितियों में तकनीकी रूप से किसी भी भूमि की पारदर्शी और सटीक नपाई संभव ही नहीं थी। इसी गंभीर खामी को आधार बनाकर उन्होंने सीमांकन के पंचनामे पर उसी वक्त अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके अलावा न्यायालय में भी विधिवत लिखित आपत्ति पेश कर यह मांग की गई थी कि शुष्क मौसम में, जब जमीन पूरी तरह स्पष्ट दिखे, तब दोबारा दोनों पक्षों की मौजूदगी में निष्पक्ष नाप कराई जाए। इसके बावजूद उनकी आपत्तियों को दरकिनार कर दिया गया और जब वे मामले की नकल निकलवाने नकल शाखा पहुंचे, तो प्रकरण से संबंधित दस्तावेज तक वहां नहीं भेजे गए थे, जो यह साफ दर्शाता है कि पर्दे के पीछे से सांठगांठ का खेल चल रहा है।

दो हल्कों के पेंच में उलझा कर नेशनल हाईवे की बेशकीमती शासकीय भूमि के साथ किसान की जमीन को निगलने की कोशिश-

मामले की तकनीकी बारीकियों और जमीन के कानूनी जाल को उजागर करते हुए कैलाश आचार्य ने बेहद चौंकाने वाले तथ्य रखे। आचार्य ने बताया कि यह पूरा विवाद छातामुड़ा और बांजीपाली दो अलग-अलग गांवों और राजस्व हल्कों की सीमा पर स्थित भूमि का है। राजस्व नियमों के मुताबिक किसी भी भूमि का खसरा नंबर एक ही हल्के और एक ही तहसील के अंतर्गत दर्ज होता है। लेकिन इस मामले में खसरा नंबर 155/2 के सीमांकन के दौरान राजस्व नियमों को ताक पर रखकर यह हास्यास्पद स्थिति बना दी गई कि आधा रकबा छातामुड़ा में और आधा रकबा बांजीपाली में दिखाया जा रहा है। राजस्व के इतिहास में ऐसी नपाई समझ से परे है।


कैलाश आचार्य ने आगे यह भी बताया कि विवादित स्थल नेशनल हाईवे से बिल्कुल सटा हुआ है, जहां खसरा नंबर 156 की बेशकीमती भूमि शासकीय मद में दर्ज है। आरोप है कि सीमा विवाद का बवंडर खड़ा करके और सीमांकन में घालमेल कर केवल किसान की निजी भूमि ही नहीं, बल्कि उस मुख्य मार्ग से सटी बहुमूल्य सरकारी जमीन को भी बाउंड्रीवॉल के भीतर समेटने की सुनियोजित चाल चली जा रही है। यदि समय रहते इस गोलमाल की उच्चस्तरीय पड़ताल नहीं हुई, तो शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व और बेशकीमती शासकीय भूमि से हाथ धोना पड़ सकता है।


तहसीलदार के दखल से रुका अवैध काम, सक्षम अधिकारियों की मौजूदगी में संयुक्त सीमांकन की उठी मांग..

पीड़ित पक्ष ने बताया कि मौके पर हो रही दबंगई और मनमाने निर्माण कार्य की लिखित व मौखिक शिकायत जब तहसीलदार महोदय से की गई, तब जाकर राजस्व प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में मौके पर चल रहे बाउंड्रीवॉल के निर्माण को रुकवाते हुए कार्य को स्थगित किया गया। हालांकि पीड़ितों का कहना है कि काम रुकना सिर्फ तात्कालिक राहत है, स्थायी न्याय तभी मिलेगा जब दूध का दूध और पानी का पानी किया जाएगा। इसे साथ ही किसान ने यह भी मांग की है कि जब तक न्यायालय कोई निष्कर्ष या निर्णय नहीं ले जाता तो मौके पर निर्माण कार्य स्थगन आदेश लिखित में जारी करें अन्यथा दबंगई पूर्वक आधी रात को कभी भी रसूल द्वारा निर्माण कार्य प्रारंभ करने की आशंका भी जताई है।


फत्तेचंद पटेल और कैलाश आचार्य ने दो-टूक शब्दों में जिला प्रशासन और वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों से मांग की है कि दोनों तहसीलों व दोनों हल्कों (छातामुड़ा और बांजीपाली) के सक्षम अधिकारियों, तहसीलदारों, राजस्व निरीक्षकों (RI) और हल्का पटवारियों की एक संयुक्त टीम गठित की जाए। इस संयुक्त दल की मौजूदगी में, पूरी पारदर्शिता के साथ, दोनों गांवों की सीमाओं का मिलान करते हुए नए सिरे से वैज्ञानिक तरीके से सीमांकन कराया जाए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक न्यायालय का कोई स्पष्ट और अंतिम आदेश नहीं आ जाता, तब तक मौके पर किसी भी तरह की यथास्थिति से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन किसान के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और शासकीय मद की जमीन को बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है या फिर रसूखदारों की मनमानी इसी तरह हावी रहेगी। #Raigarh #ChhattisgarhNews #RevenueDispute #LandDispute #DemarcationDispute #IllegalConstruction #GovernmentLand #FarmerRights #TehsilOffice #RevenueDepartment #breakingADNnews

Comments


© 2018 by Anis lala dani. Proudly created with breakingadnnews.com

  • Subscribe Channale
bottom of page
naver-site-verification: navere8d42c0359e3e135363406d5b6093c27.html