अजय देवगन की पहली फिल्म 'फूल और कांटे': जब दो चलती बाइकों पर सवार होकर रातोंरात स्टार बन गए थे अभिनेता....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:- साल 1991 में रिलीज हुई फिल्म 'फूल और कांटे' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाले अजय देवगन की हीरो के तौर पर एंट्री बेहद शानदार थी। वह दो चलती मोटरसाइकिलों पर पैर फैलाकर खड़े नजर आए थे, जिसे देखकर सिनेमाघरों में सीटियां बजने लगीं। दिलचस्प बात यह है कि अजय खुद हीरो बनना ही नहीं चाहते थे, बल्कि उनकी दिलचस्पी फिल्में बनाने और कैमरे के पीछे काम करने में थी। उनके पिता वीरू देवगन बॉलीवुड के जाने-माने एक्शन डायरेक्टर और स्टंट कोरियोग्राफर थे, जिनकी दिली ख्वाहिश थी कि उनका बेटा हीरो बने। इसी बीच निर्देशक कुकू कोहली एक नई फिल्म की तैयारी कर रहे थे और उन्हें नए चेहरे की तलाश थी। वीरू देवगन ने बेटे को इस फिल्म में लॉन्च करने की बात आगे बढ़ाई, हालांकि अजय इसके लिए तैयार नहीं थे। मगर पिता और निर्देशक के समझाने पर वह मान गए।
अक्षय कुमार के नाम पर भी हुआ था विचार
कुकू कोहली ने बाद में बताया था कि फिल्म के लिए पहले अक्षय कुमार के नाम पर भी विचार हुआ था, लेकिन तारीखों की समस्या के कारण बात आगे नहीं बढ़ी। इसके बाद उनकी नजर वीरू देवगन के ऑफिस में लगी अजय की तस्वीर पर पड़ी। अजय को बुलाया गया और उन्होंने 'जंजीर' फिल्म के डायलॉग सुनाकर ऑडिशन दिया, जिससे उनका आत्मविश्वास देखकर उन्हें मुख्य भूमिका मिल गई। अजय का असली नाम विशाल देवगन था, जिसे फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद बदलकर अजय देवगन कर दिया गया। उस दौर में कई नए कलाकार एक जैसे नामों के साथ आ रहे थे, इसलिए उनकी मां वीणा देवगन भी नाम बदलने के पक्ष में थीं।
बाइक वाला ऐतिहासिक स्टंट और शानदार सफलता
'फूल और कांटे' में अजय की iconic बाइक वाली एंट्री के पीछे उनके पिता वीरू देवगन का बड़ा हाथ था। अजय बचपन से एक्शन और स्टंट की ट्रेनिंग लेते रहे थे, इसलिए जब उनके पिता ने पूछा कि क्या वह यह स्टंट कर पाएंगे, तो उन्होंने हां कह दिया क्योंकि वह स्प्लिट कर सकते थे। हालांकि, जमीन पर पैर फैलाना और चलती मोटरसाइकिलों पर संतुलन बनाना दो अलग बातें थीं। इस सीन ने दर्शकों को चौंका दिया और अजय की पहचान एक एक्शन हीरो के रूप में बन गई। फिल्म में अजय के साथ मधु ने मुख्य भूमिका निभाई, जबकि अमरीश पुरी ने खलनायक का किरदार निभाया। इसके अलावा जगदीप और अरुणा ईरानी जैसे मंझे हुए कलाकार भी फिल्म में नजर आए। फिल्म की कहानी रोमांस, पारिवारिक टकराव और एक्शन का बेहतरीन मेल थी, जिसे युवाओं ने बहुत पसंद किया। नदीम-श्रवण के संगीत से सजे गाने जैसे 'तुमसे मिलने को दिल करता है', 'धीरे धीरे प्यार को बढ़ाना है' और 'मैंने प्यार तुम ही से किया है' उस दौर में लोगों की जुबान पर चढ़ गए।
नवंबर 1991 में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई। अजय ने बाद में कहा था कि अगर पहली फिल्म नहीं चलती, तो वह शायद फिल्ममेकिंग की तरफ लौट जाते। लेकिन इस सफलता ने उनके करियर की दिशा ही बदल दी और आगे चलकर उन्होंने 'जख्म', 'कंपनी', 'गंगाजल' और 'ओमकारा' जैसी फिल्मों में गंभीर अभिनय से अपनी एक अलग पहचान बनाई।






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