फर्जीवाड़ा मामले में आरोपी को जमानत, कलेक्टर ने जिला जज को पत्र लिख उठाए गंभीर सवाल....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
अंबिकापुर (सरगुजा): जिले में आदिवासी भूमि के फर्जीवाड़े और अवैध नामांतरण का मामला अब एक नए कानूनी विवाद में तब्दील हो गया है।
जमीन घोटाले के मुख्य आरोपी आजाद इराकी को न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से तत्काल जमानत मिलने के बाद, कलेक्टर अजीत बसंत ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को पत्र लिखकर जमानत प्रक्रिया और न्यायालय के क्षेत्राधिकार पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
क्या है पूरा मामला ?
यह पूरा विवाद अंबिकापुर शहर के प्रतीक्षा बस स्टैंड के पास स्थित रिंगबांध तालाब क्षेत्र की जमीन (खसरा क्रमांक 3714, रकबा 0.231 हेक्टेयर) से जुड़ा है। प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई थी कि आपराधिक षड्यंत्र और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए पुराने रिकॉर्ड से 'अनुसूचित जनजाति' की प्रविष्टि को हटाकर जमीन का नामांतरण गैर-आदिवासी के नाम पर कर दिया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने 24 सितंबर 2026 को मणिपुर थाने में आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत केस (अपराध क्रमांक 168/2026) दर्ज कर आजाद इराकी को रायपुर से गिरफ्तार किया था।
अभियोजन को सुने बिना दे दी गई जमानत -
गिरफ्तारी के अगले दिन, 25 सितंबर को आरोपी को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जमानत दे दी गई। इसी आदेश के खिलाफ कलेक्टर ने जिला जज को पत्र लिखा है। जिला अभियोजन निदेशालय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पत्र में बताया गया है कि जमानत पर सुनवाई के दौरान शासन की ओर से कोई भी सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी (ADPO) कोर्ट में उपस्थित नहीं था। यहां तक कि अभियोजन पक्ष को जमानत आवेदन की प्रति तक नहीं दी गई थी, जिससे प्रशासन को अपना पक्ष रखने का अवसर ही नहीं मिला।
एट्रोसिटी एक्ट और क्षेत्राधिकार पर उठे सवाल -
प्रशासन की ओर से सबसे बड़ी आपत्ति मामले की प्रकृति को लेकर जताई गई है। कलेक्टर के पत्र में तर्क दिया गया है कि चूंकि यह सीधे तौर पर एक आदिवासी की जमीन को हेरफेर कर गैर-आदिवासी के नाम करने का मामला है, इसलिए इसमें प्रथम दृष्टया अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(F) लागू होनी चाहिए। यदि यह धारा जुड़ती है, तो इस मामले की सुनवाई का अधिकार केवल 'विशेष न्यायालय' को होगा, न कि सामान्य मजिस्ट्रेट कोर्ट को।
पहले भी दर्ज हो चुका है मामला -
रिंगबांध तालाब क्षेत्र को लेकर विवाद नया नहीं है। इससे पहले नगर निगम द्वारा यहां मिट्टी हटाने की कार्रवाई के दौरान भी शासकीय कार्य में बाधा डालने और अधिकारियों-कर्मचारियों को धमकाने के आरोप में आजाद इराकी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
आगे क्या ?
कलेक्टर ने अपने पत्र में जमानत आदेश के खिलाफ अपील या पुनरीक्षण (Revision) याचिका दायर करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अभियोजन पक्ष इस जमानत आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती देता है या नहीं और मामले की आगे की न्यायिक जांच में क्या नए तथ्य निकलकर सामने आते हैं।






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