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मनरेगा को अप्रत्यक्ष रूप से बंद करने का षड़यंत्र किया जा रहा....

Aug 7
3 min read
  • मुख्यमंत्री की पत्रकार वार्ता पर पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज का पलटवार |

  • अब मनरेगा की प्राथमिकता में रोजगार देना नहीं, निर्माण कार्य है - दीपक बैज |

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से:-

रायपुर भाजपा सरकार मनरेगा के स्वरूप को बदलकर मजदूरों गरीबों के हक रोजी-रोटी को समाप्त करने जा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि अब मनरेगा की प्राथमिकता में रोजगार देना नहीं निर्माण कार्य है। मनरेगा को अप्रत्यक्ष रूप से बंद करने का षड़यंत्र किया जा रहा। मनरेगा में स्कूलों में शौचालय और मुक्तिधाम बनाने जा रहे, इन कामों में तो मजदूरों को रोजगार कम मिलेगा तथा ज्यादा खर्च निर्माण सामाग्री पर खर्च होगा। इस फैसले से मनरेगा शुरू करने का उद्देश्य समाप्त हो रहा है। अब मनरेगा के बजट का बड़ा हिस्सा 40 प्रतिशत मजदूरों के भुगतान पर नहीं सामाग्री खरीदने तथा मशीनों से काम पर होगा। इस योजना का उद्देश्य मजदूरों से काम करवा कर उनको रोजगार देना है न कि योजना मूलक योजना है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार जीरामजी योजना में मजदूरों का हक मार रही है।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि केंद्र सरकार ने जब मनरेगा के स्वरूप को बदलकर जीरामजी किया तभी से यह अंदेशा व्यक्त किया जा रहा था कि इस योजना को भाजपा सरकार बंद करना चाह रही है। साय सरकार के फैसले से यह आशंका सही साबित हो गयी कि मनरेगा को बंद ही कर दिया जा रहा है। अब रोजगार देना प्राथमिकता नहीं है बल्कि निर्माण कार्य प्राथमिकता है। केंद्र और राज्य सरकारें वैसे सड़क, पुल-पुलिया, सामुदायिक भवन, शौचालय, स्कूल भवन आदि बनाते रहे है इससे पहले मनरेगा को इसलिए नहीं जोड़ा गया क्योंकि मनरेगा केवल रोजगार देने वाली योजना रहे लेकिन भाजपा मजदूरों को काम देने को प्राथमिकता में नहीं रख रही है, वह मनरेगा को अप्रत्यक्ष रूप से बंद ही करना ही है।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस की मनमोहन सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र में मजदूरों को रोजगार देने के लिए मनरेगा शुरू किया था। मोदी सरकार ने मनरेगा को बंद करने के लिए उसके स्वरूप को बदल कर जीरामजी कर दिया। पहले यह पूरी तरह से केंद्र पोषित योजना थी, अब इसमें केंद्र और राज्य का हिस्सा 60-40 का कर दिया। पहले मनरेगा के काम केवल श्रमिकों से कराये जाते थे, राज्य सरकार ने इसमें मशीनों से काम निर्माण सामाग्री व्यय को भी शामिल कर दिया। यह तो मनरेगा की मूल आत्मा को मारने जैसा है। महंगाई 180 प्रतिशत बढ़ गई, मनरेगा की मजदूरी मात्र 39 रू. बढ़ाकर अपनी पीठ थपथपा रहे।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा की सरकारों की दुर्भावना के चलते ही गरीब परिवारों के रोजगार के अधिकार की यह महत्वपूर्ण योजना छत्तीसगढ़ में दम तोड़ चुका है। पिछले ढाई साल से जब से भाजपा की सरकार आई है पूरे प्रदेश में मनरेगा अघोषित तौर पर बंद कर दिया गया है। मनरेगा रोजगार की कानूनी गारंटी है कोई भी सरकार मनरेगा के काम को बंद नहीं कर सकती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में 70 प्रतिशत से अधिक गांव में मनरेगा के काम बंद कर दिए गए। मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है, लोग पलायन के लिए मजबूर है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ में लगभग 18 करोड़ कार्य दिवस हर साल सृजित किए जाते थे, भाजपा की सरकार आने के बाद से इस महत्वपूर्ण योजना पर ग्रहण लग गया है। सरकार से यह मांग है कि बताएं कि प्रदेश में कितने स्थान पर मनरेगा का काम चल रहा है? विगत दो साल में प्रदेश में मनरेगा के तहत दिए गए रोजगार की सूची जारी करे।

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