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जब हर सेकंड कीमती हो : क्रिटिकल केयर की जागरूकता बचा सकती है जान...

Oct 9
3 min read
  • सीनियर कंसल्टेंट एवं लीड, इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन, एनएच एमएमआई हॉस्पिटल, रायपुर...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से:-

आईसीयू (ICU) एक ऐसी जगह है, जहाँ कोई भी जाना नहीं चाहता। फिर भी, लगभग हर परिवार में कभी न कभी कोई ऐसा सदस्य होता है जिसे संक्रमण, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, दुर्घटना, बड़ी सर्जरी या ज़हर के कारण आईसीयू में भर्ती करना पड़ा हो। क्रिटिकल केयर उन मरीज़ों के लिए जीवनरक्षक साबित होती है, जिन्हें गंभीर बीमारी में तुरंत इलाज और सघन देखभाल की ज़रूरत होती है। यह विशेष देखभाल इंटेंसिविस्ट और मल्टीडिसिप्लिनरी (बहु-विषयी) टीम द्वारा दी जाती है, जिसमें कंसल्टेंट, नर्स, इमरजेंसी फिजिशियन, रेस्पिरेटरी थेरेपिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, फार्मासिस्ट और टेक्नीशियन शामिल होते हैं।


क्रिटिकल केयर: अस्पताल पहुँचने से पहले की तैयारी

कुछ गंभीर बीमारियों के लक्षण ऐसे होते हैं, जिनमें तुरंत क्रिटिकल केयर की आवश्यकता पड़ती है:


  • गंभीर संक्रमण: तेज़ साँस चलना, भ्रम की स्थिति, ब्लड प्रेशर कम होना और पेशाब कम आना।

  • हार्ट अटैक: सीने में भारी दबाव, अत्यधिक पसीना या साँस फूलना।

  • स्ट्रोक (लकवा): अचानक चेहरा टेढ़ा हो जाना, हाथ-पैर में कमज़ोरी और बोलने में परेशानी।


यह ज़रूरी नहीं कि सबसे नज़दीकी अस्पताल में हर बार क्रिटिकल केयर की पूरी सुविधा उपलब्ध हो। इसलिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि किस अस्पताल में चौबीसों घंटे इंटेंसिविस्ट, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, आधुनिक जाँच की सुविधाएँ और क्रिटिकल केयर के अन्य संसाधन मौजूद हैं। आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं की क्षमता का आकलन कर लेना समझदारी है।


इन तीन नियमों को अपनाएँ:

जल्दी पहचानें • जल्दी इलाज कराएँ • जल्दी रेफर करें

यदि आपको या आपके किसी अपने में नीचे दिए गए खतरे के संकेत दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी इमरजेंसी अस्पताल का रुख करें:


  • साँस लेने में अचानक या अत्यधिक तकलीफ़ होना।

  • अचानक भ्रम की स्थिति, बहुत ज़्यादा नींद आना, दौरे पड़ना या बेहोशी छा जाना।

  • सीने में बेचैनी, दबाव या दर्द, साथ में पसीना, जी मिचलाना और साँस फूलना।

  • शरीर के किसी हिस्से में अचानक कमज़ोरी, चेहरा टेढ़ा होना या बोलने व समझने में कठिनाई।

  • ब्लड प्रेशर गिरना, चक्कर आकर बेहोश होना या त्वचा का ठंडी और चिपचिपी होना।

  • पेशाब की मात्रा में भारी कमी या शरीर में तेज़ी से सूजन आना।

  • गंभीर दुर्घटना, ज़हर का सेवन, अत्यधिक रक्तस्राव या दवा की ओवरडोज़।


हर नागरिक क्या योगदान दे सकता है ?

  1. सीपीआर (CPR) सीखें और यह जानें कि आपात स्थिति में मदद कहाँ से और कैसे मिलेगी।

  2. हार्ट अटैक और स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानना सीखें।

  3. गंभीर संक्रमण का समय पर इलाज करवाएं और कभी भी डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक्स न लें।

  4. सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करें—हमेशा हेलमेट पहनें, सीट बेल्ट लगाएँ और बच्चों के लिए चाइल्ड सेफ्टी सीट का उपयोग करें।

  5. अपनी मेडिकल हिस्ट्री, एलर्जी और वर्तमान में चल रही दवाओं की सूची हमेशा अपडेट रखें।

  6. अपने परिवार के साथ अंगदान और ऊतक दान (Tissue Donation) जैसे संवेदनशील विषयों पर खुलकर चर्चा करें।


संवेदनशीलता और स्वास्थ्य लाभ

उत्कृष्ट क्रिटिकल केयर के लिए केवल चिकित्सा विज्ञान ही नहीं, बल्कि संवेदनशीलता भी उतनी ही ज़रूरी है। इसका अर्थ है मरीज़ के परिवार के साथ पूरी गरिमा और सम्मान से पेश आना, उन्हें हर अपडेट से अवगत कराना, और मरीज़ के आराम का पूरा ध्यान रखते हुए उसके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ में सहायता करना। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी ज़्यादातर मरीज़ों को पुनर्वास (Rehabilitation), पौष्टिक आहार, फिजियोथेरेपी और मानसिक सहारे की ज़रूरत होती है। पूरी तरह स्वस्थ होने के लिए इन सभी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।


9 अक्टूबर: आईएससीसीएम स्थापना दिवस (ISCCM Day)

इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन (ISCCM) की स्थापना 9 अक्टूबर 1993 को हुई थी। तब से लेकर आज तक इस संस्था ने भारत में क्रिटिकल केयर मेडिसिन के विकास, मानकों और नियमन में अभूतपूर्व योगदान दिया है। आम जनता में क्रिटिकल केयर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ही इस विशेष दिन को चुना गया है।


इस स्थापना दिवस का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है: सही समय पर जीवन बचाने वाला इलाज लें। हर व्यक्ति को गंभीर बीमारी या चोट के शुरुआती संकेतों को पहचानकर तुरंत इमरजेंसी में पहुँचना चाहिए। याद रखें, आईसीयू की हर मशीन के पीछे एक इंसान, उसका परिवार और स्वास्थ्यकर्मियों की एक समर्पित टीम होती है, जो मिलकर मौत और बीमारी से लड़ती है।


जब हर सेकंड कीमती हो, तब जागरूकता ही सबसे बड़ा जीवन रक्षक है।

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