विकास उपाध्याय का केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला - बोले, "दीये जलाने से नहीं, रोजगार और महंगाई पर काम करने से सुधरेंगे हालात".....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर: कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर लाखों दीये जलाने के अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकारी मशीनरी का खुलकर दुरुपयोग कर रही है।
विकास उपाध्याय ने कहा, “प्रधानमंत्री के जन्मदिन के कार्यक्रम में मितानिनों, शिक्षकों और नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारियों तक को जबरन लगाया जा रहा है। यदि जन्मदिन पर बेरोजगारी कम करने, युवाओं को रोजगार देने और महंगाई पर लगाम लगाने का संकल्प लिया जाता, तो प्रदेश की जनता के लिए यह ज्यादा सार्थक होता। दीये जलाने से जनता की समस्याएं दूर नहीं होंगी, बल्कि रोजगार और महंगाई पर ठोस कदम उठाने से होंगी।”
"मोदी ने जन्मदिन पर देश से मांग लिया रिटर्न गिफ्ट!"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के ठीक पहले यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन को लेकर विकास उपाध्याय ने केंद्र सरकार पर बड़ा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ जश्न मनाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ जनता और व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने की तैयारी हो रही है।
क्या है पूरा मामला ?
नया नियम: आगामी 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र मर्चेंट (व्यापारी) यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लागू किया जाएगा।
सीमा: सामान्य श्रेणी के लेन-देन में प्रति ट्रांजैक्शन 300 रुपये तक की सीमा निर्धारित की गई है।
व्यापारियों पर असर: हालांकि सरकार का कहना है कि यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा, लेकिन जानकारों का मानना है कि इससे व्यापारियों की ऑपरेशनल लागत बढ़ जाएगी।
छोटे व्यापारियों को होगा नुकसान -
विकास उपाध्याय ने आंकड़े रखते हुए कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन भले ही संख्या में करीब 4% हों, लेकिन कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू के हिसाब से इनका हिस्सा लगभग दो-तिहाई है।
उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा- “जब डिजिटल इंडिया की सफलता का ढिंढोरा पीटा जाता है, तो फिर बड़े व्यापारी लेन-देन पर नई लागत क्यों थोपी जा रही है? किसी चाय वाले, पोहा वाले या किराना दुकानदार से पूछिए कि रोज के काम में इसका कितना असर पड़ेगा।”
मुख्य मांगें एवं तीखे सवाल -
शून्य-एमडीआर मॉडल की वापसी: जब यूपीआई को बढ़ावा देना था, तब जीरो-एमडीआर मॉडल अपनाया गया था। अब जब यह देश की जरूरत बन चुका है, तो इस पर नई लागत क्यों जोड़ी जा रही है?
पुनर्विचार की मांग: विकास उपाध्याय ने केंद्र सरकार से मांग की है कि 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR की व्यवस्था पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए, ताकि देश की डिजिटल ताकत व्यापारियों के लिए बोझ न बने।





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