बार अभ्यारण्य में अब शिकारियों की धर पकड़ लगभग बन्द हो चुकी है

विकास अग्रवाल (बया)की कलम से
यहां पदस्थ अफसर शिकारियों को पकड़ने की बजाय अपने बंगलो में मात्र नई योजना एवम जंगल मे किस कार्य के लिए राशि स्वीकृत कराई जा सकती है।इसमें ही लगे रहते है।दूसरी ओर उच्च पदस्थ अफसर मंत्री सचिव स्तर पर शिकार नही पकड़े जाने से सब कुशल मंगल ही समझ रहे है।
बारनयापारा अभ्यारण्य में वर्तमान अफसरों की पदस्थापना के पूर्व के अफसरों ने अभ्यारण्य में शिकार के अनेक मामले पकड़ कर आरोपियों को सींखचों के पीछे पहुचाया था।जिससे यह समझा जाता था कि जंगल मे शिकार हो रहे है और शिकारी सक्रिय है परन्तु अब समय के साथ नए अफसरों ने कार्य का तरीका ही बदल दिया।अब अफसर ना तो जंगल का दौरा करते है और ना ही शिकार या अवैध कटाई के मामले पकड़ने में कोई दिलचस्पी ही रखते है।सूत्र बताते है कि ऐसा नही है कि इन्हें शिकार के या अवैध कटाई के सम्बन्ध में कोई जानकारी नही है।इन्हें सब जानकारी होते हुए भी मात्र इसलिए मामला नही बनाते की इससे उन पर ये आरोप लगने लगेगा कि उनके क्षेत्र में शिकार हो रहे है।इसलिए अब ये सब अवैध कार्य छिपाने के लिए बार, कोठारी सहित लवन परिक्षेत्र में शिकार के प्रकरण बनने ही बन्द हो गए और सब कथित खैरियत के हालात बन गए है।
।।पूर्व के अफसरों पर हमले भी हुए।।
शिकार एवम अवैध कटाई के आरोपियों को पकड़ने के मामले में पूर्व के अधिकारी खासी मेहनत करते थे लिहाजा एक रेंजर से रामपुर में अवैध कटाई को लेकर मारपीट तक कि नोबत आयी जबकि इसके पूर्व बार मे पदस्थ अधीक्षक हमेशा अवैध कटाई,अतिक्रमण एवम शिकारियों के निशाने पर रहते थे।जबकि वर्तमान अफसरो को जंगल कटाई एवम शिकार के मामलों से कोई लेना देना नही है।इन अफसरों को मात्र सड़क एवम तालाब के कार्य करने में ही ज्यादा दिलचस्पी है।लिहाजा उक्त सभी परिक्षेत्र में शिकार अवैध कब्जा एवम कटाई अनवरत जारी है।
।।दुर्लभ पेंगुलिन मामले में भी कोई कार्यवाही नही।।
विगत दिनों वन विभाग की अनुपस्थिति में सांकरा पुलिस ने एक शिकारी को दुर्लभ वन्य प्राणी पेंगुलिन के साथ धर दबोचा था।इस मामले में पकड़े गए शिकारियों ने अपने बयान में बकायदा यह स्वीकार भी किया था की उन्होंने दुर्लभ प्राणी को बार के जंगल से पकड़ा है।इसके बाद भी बार एवम जिले के उच्च अफसरों ने उक्त मामले को वही बन्द कर दिया।जबकि विभागीय जानकर बताते है कि आरोपी को रिमांड पर लेकर मामले की सूक्ष्म जांच के साथ अन्य शिकारियों के बारे में भी विभागीय अफसरों को पता लगाया जाना चाहिए था।
अभ्यारण्य के वन परिक्षेत्र कोठारी के जंगलों में 18 हाथियों का दल विचरण कर रहा है,

जिसमें 3 शावक भी शामिल हैं। इस संबंध में 'नवभारत’ संवाददाता ने बार नवापारा अभ्यारण्य कार्यालय पहुंच कर जानकारी ली। अधीक्षक आर एस मिश्रा ने बताया कि 3 दिनों तक 18 हाथियों का दल कोठार अभ्यारण्य के कक्ष क्रमांक 172 एवं 173 के घने जंगल में रहवास किए हुए थे।
खैर छापर कक्ष क्रमांक 169 जहां असम से लाए 2 वनभैसों का 10 हेक्टेयर में सुरक्षित आवास बनाया गया है ,पूर्व की भांति नजदीक पहुंचने का अंदेशा व्यक्त किया जा रहा था ।जिसके लिए कर्मचारियों को रात दिन सतर्क रहने के निर्देश दिए गए थे किंतु चौथे दिन बुधवार को सुबह बिलासपुरिया बेरियर के नजदीक ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों नें देखा था। बताया गया कि आसपास विचरण कर हाथी पुन: कक्ष क्रमांक 173 के घने जंगल में चले गए। बताया गया है कि वहां बारह मासी एक झील है जहां पीने और नहाने की पर्याप्त सुविधा है।
अधीक्षक कार्यालय में चर्चा हो ही रही थी कि परिक्षेत्र अधिकार अभ्यारण्य बार कृषाणु चंद्राकर ने सूचना दिया कि कोठा री परिक्षेत्र अधिकारी पवन सिन्हा को खबर मिली है कि 12 हाथियों को दोपहर 2 बजे कोठारी से बार पर्यटकों के लिए बनाए एप्रोच सडक़ मार्ग पर ही 12 हाथियों का दल लोढ़ा घाट में देखा गया है । सूचना मिलते ही उक्त सडक़ मार्ग में दोनों छोर से आवागमन बंद कर दिया गया है। बताया गया कि अन्य 6 हाथी जो शावक के साथ आस पास ही होंगे जो मिल जाएंगे।
लोढ़ा घाट जहां हाथियों को देखा गया है उसके स्थान परिवर्तन के दो मार्ग रह गए हैं, जिसमें एक मार्ग दुलही बहल दर्शनीय पर्यटन स्थल होते कोसमसरा पकरीद की ओर देवपुर परिक्षेत्र के जंगल की ओर कूच करेगा अथवा वहां से कोठारी जंगल होते कसडोल पिथौरा मुख्य सडक़ मार्ग क्रासकर देवपुर सोनाखान अर्जुबी परिक्षेत्र के जंगलों में भ्रमण कर सकता है।
अधीक्षक श्री मिश्रा ने बताया कि वन विकास निगम को मिलाकर 8 वन परिक्षेत्र का विस्तृत जंगल क्षेत्र है जो हाथियों के लिए सुरक्षित हो गया है। बताया गया है कि अभी धान बोनी का काम सम्पन्न होने जा रहा है जिससे गांव अथवा खेतों की ओर जाना असंभव लग रहा है। अत: जंगलों में ही हाथी गुजर बसर करने की संभावना है। वन विभाग सतत निगरानी कर रहा है तथा संभावित ग्रामों को सतर्क किया जा रहा है ।






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