विजयादशमी 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को दी दशहरे की बधाई....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:- नई दिल्ली: देशभर में मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश और विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में राष्ट्रपति ने भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और कर्तव्य के महत्व पर जोर देते हुए देशवासियों से एक समावेशी समाज और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विजयादशमी केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और सत्य की विजय का प्रतीक है। राष्ट्रपति ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के उच्च मूल्यों को बनाए रखने का संदेश दिया है।
राष्ट्रपति ने देशवासियों को दी विजयादशमी की बधाई
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए देश-विदेश के सभी नागरिकों के प्रति अपनी मंगलकामनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि विजयादशमी का पर्व भारतीय समाज और संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। यह त्योहार भगवान श्रीराम की रावण पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है। भगवान श्रीराम को धर्म, नैतिकता और आदर्श आचरण का प्रतीक माना जाता है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह पर्व हमें सत्य, न्याय और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उनके इस संदेश में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक एकता और राष्ट्रीय विकास पर विशेष जोर दिया गया है।
भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने की अपील
राष्ट्रपति मुर्मू ने भगवान श्रीराम के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में धर्म और नैतिक आचरण का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने बताया कि विजयादशमी का पर्व अधर्म और अन्याय पर धर्म तथा न्याय की जीत का उत्सव है। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और सत्य के प्रति समर्पण का प्रतीक है। राष्ट्रपति के संदेश का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को इन्हीं मूल्यों से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए प्रोत्साहित करना था। उन्होंने देशवासियों से अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के आदर्शों को बनाए रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
विकसित भारत के निर्माण में योगदान का संदेश
विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'विकसित भारत' के निर्माण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति नैतिकता और कर्तव्य के आदर्शों पर आधारित है, इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपनी सांस्कृतिक विरासत के उच्च आदर्शों का पालन करना चाहिए। राष्ट्रपति ने देशवासियों से एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया, जहाँ विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचे। उन्होंने एक समावेशी समाज की स्थापना को भी महत्वपूर्ण बताया। समावेशी समाज का आशय ऐसी सामाजिक व्यवस्था से है, जिसमें सभी नागरिकों को समान अवसर, सम्मान और आगे बढ़ने की सुविधाएं प्राप्त हों।
सोमवार को जारी हुआ था आधिकारिक संदेश
राष्ट्रपति भवन की ओर से सोमवार, 19 अक्टूबर को विजयादशमी की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का आधिकारिक संदेश जारी किया गया था। इसके बाद मंगलवार को राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने देशवासियों के सुख, अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण की कामना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करने के साथ देश की प्रगति में योगदान देना भी प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने भी दी शुभकामनाएं
विजयादशमी के अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर आसीन इन नेताओं ने इस त्यौहार को सकारात्मकता, सत्य और अच्छाई की विजय का प्रतीक बताया है।
विजयादशमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
हिंदू धर्म में विजयादशमी को 'दशहरा' के नाम से भी जाना जाता है, जो शारदीय नवरात्रि के समापन का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था। इसके अलावा, यह पर्व देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जुड़ा हुआ है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को मनाने की परंपराएं भिन्न हैं, लेकिन सभी का मूल संदेश 'बुराई पर अच्छाई की जीत' ही रहता है। उत्तर भारत में रावण दहन और रामलीला का विशेष महत्व है, जबकि पश्चिम बंगाल सहित पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ उत्सव संपन्न होता है।
सामाजिक एकता का संदेश देता है दशहरा
विजयादशमी का त्यौहार केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे का संदेश भी देता है। राष्ट्रपति मुर्मू की ओर से समावेशी समाज बनाने की अपील इसी व्यापक सामाजिक भावना से जुड़ी है। सांस्कृतिक विविधता से समृद्ध भारत में अलग-अलग परंपराओं का सम्मान करना राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने का एक सशक्त माध्यम है। राष्ट्रपति का यह संदेश नागरिकों को व्यक्तिगत जीवन में नैतिकता, न्याय और उत्तरदायित्व के महत्व को समझने की प्रेरणा देता है। #PresidentMurmu #Vijayadashami2026 #Dussehra #Aashadh #IndianCulture #BreakingADNNews #NationalNews






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