विजिलेंस ने ST-SC विभाग के दो ऑडिटर्स से जब्त किए 14.38 लाख रुपये...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
ओडिशा :- विजिलेंस ने अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के दो ऑडिटर्स के पास से कुल 14 लाख 38 हजार 340 रुपये की संदिग्ध नकदी जब्त की है। दोनों अधिकारियों को रात बारीपदा में उस समय रोका गया जब वे जिला कल्याण अधिकारी के कार्यालय से एक होटल में स्थित अपने ठहरने के स्थान पर जा रहे थे। तलाशी के दौरान सरकारी स्कॉर्पियो और उनके होटल के कमरों से नकदी बरामद हुई। विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार उन्हें दोनों ऑडिटर्स के पास बड़ी मात्रा में संदिग्ध नकदी होने की विश्वसनीय सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर एक टीम ने उनकी गतिविधियों पर नजर रखी। दोनों अधिकारी बारीपदा स्थित जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय से निकलकर रॉक्सी लेन में स्थित महापात्रा होटल जा रहे थे।
ऑडिटर्स यात्रा के लिए एक सरकारी स्कॉर्पियो वाहन का इस्तेमाल कर रहे थे। रास्ते में विजिलेंस टीम ने वाहन को रोककर उसमें मौजूद अधिकारियों और उनके सामान की तलाशी ली। जांच के दौरान टीम को अलग-अलग लिफाफों और खुले बंडलों में रखी बड़ी मात्रा में नकदी मिली। वाहन की तलाशी के दौरान कुल पांच लाख 51 हजार 510 रुपये बरामद किए गए। इसमें रुपये के नोट 52 अलग-अलग लिफाफों और 20 खुले बंडलों में रखे हुए थे। इतनी बड़ी रकम के अलग-अलग लिफाफों में मिलने के कारण विजिलेंस अधिकारियों का संदेह और गहरा गया। टीम ने दोनों ऑडिटर्स से नकदी के स्रोत तथा इसे ले जाने के कारण के बारे में सवाल किए।
विजिलेंस के मुताबिक दोनों ऑडिटर्स बरामद धनराशि के बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। उनसे पूछा गया कि नकदी किसकी है, कहां से प्राप्त हुई और इसे किस उद्देश्य से होटल ले जाया जा रहा था। अधिकारियों को इन सवालों का स्पष्ट उत्तर नहीं मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया। इसके बाद विजिलेंस की टीम रॉक्सी लेन स्थित महापात्रा होटल पहुंची। दोनों ऑडिटर्स ने वहां कमरे ले रखे थे। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद अधिकारियों ने उनके होटल के कमरों की तलाशी ली। इस तलाशी में आठ लाख 86 हजार 830 रुपये की अतिरिक्त नकदी बरामद हुई।
सरकारी वाहन से मिले पांच लाख 51 हजार 510 रुपये और होटल के कमरों से मिले आठ लाख 86 हजार 830 रुपये को मिलाकर कुल जब्त राशि 14 लाख 38 हजार 340 रुपये हो गई। नकदी के स्रोत और स्वामित्व के बारे में संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने पर विजिलेंस ने पूरी रकम जब्त कर ली। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अलग-अलग लिफाफों में रखे रुपये दोनों ऑडिटर्स तक कैसे पहुंचे। 52 लिफाफों में नकदी का मिलना इस मामले की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। प्रत्येक लिफाफे पर कोई नाम, निशान या दूसरी पहचान लिखी थी या नहीं इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
ऑडिटर्स जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय में किस उद्देश्य से पहुंचे थे और वहां उन्होंने किन दस्तावेजों या योजनाओं की जांच की थी यह भी जांच का विषय हो सकता है। विजिलेंस टीम संबंधित कार्यालय के कर्मचारियों, अधिकारियों और उपलब्ध दस्तावेजों से जानकारी जुटाकर नकदी के संभावित स्रोत तक पहुंचने की कोशिश कर सकती है। दोनों ऑडिटर्स अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग से जुड़े बताए गए हैं। यह विभाग सामाजिक कल्याण, छात्रावासों, शिक्षा और वंचित समुदायों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की देखरेख करता है। विभागीय योजनाओं और खर्च का ऑडिट करने वाले अधिकारियों के पास संदिग्ध नकदी मिलने से वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे हैं।
ऑडिट की प्रक्रिया का उद्देश्य सरकारी धन के इस्तेमाल और विभागीय खर्चों की जांच करना होता है। ऑडिटर्स को रिकॉर्ड का मिलान करके यह देखना होता है कि बजट और योजनाओं के लिए जारी राशि का उपयोग नियमों के अनुरूप हुआ या नहीं। ऐसे पद पर कार्यरत अधिकारियों से बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी मिलने का मामला संवेदनशील माना जा रहा है। हालांकि केवल नकदी बरामद होना अपने आप में आरोप सिद्ध होना नहीं है। जांच एजेंसी को यह स्थापित करना होगा कि रुपये कहां से आए और क्या उनका संबंध किसी गैरकानूनी लेनदेन से था। दोनों अधिकारियों को अपनी आय, बैंक निकासी या अन्य वैध स्रोतों से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
यदि ऑडिटर्स नकदी का वैध स्रोत साबित करने वाले दस्तावेज उपलब्ध कराते हैं तो जांच में उन तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा। यदि वे उचित प्रमाण नहीं दे पाते हैं तो उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। विजिलेंस अधिकारी सरकारी स्कॉर्पियो के चालक और उसमें यात्रा करने वाले अन्य लोगों से भी पूछताछ कर सकते हैं। वाहन की आधिकारिक लॉगबुक से यह पता लगाया जा सकता है कि वह किस आदेश पर इस्तेमाल किया गया था और दिनभर किन स्थानों पर गया। वाहन के मार्ग पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज से भी गतिविधियों की पुष्टि हो सकती है।
होटल के रिकॉर्ड भी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऑडिटर्स ने कमरे कब बुक किए, वहां कौन-कौन उनसे मिलने आया और वे कितने दिनों से ठहरे हुए थे इसकी जानकारी जुटाई जा सकती है। होटल के प्रवेश और गलियारों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रदान कर सकते हैं। विजिलेंस टीम लिफाफों और खुले बंडलों में मौजूद नोटों का विस्तृत विवरण तैयार कर सकती है। नकदी की गिनती, नोटों के मूल्यवर्ग और अन्य जानकारियों को जब्ती दस्तावेज में दर्ज किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया के दौरान स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी और कानूनी नियमों का पालन भी आवश्यक होगा।
मामला सामने आने के बाद संबंधित विभाग से भी दोनों ऑडिटर्स के दौरे और जिम्मेदारियों की जानकारी मांगी जा सकती है। यदि वे आधिकारिक ऑडिट के लिए बारीपदा पहुंचे थे तो दौरे से जुड़े आदेश, ऑडिट कार्यक्रम और उनकी रिपोर्ट की जांच होने की संभावना है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि नकदी का उनके आधिकारिक काम से कोई संबंध था या नहीं। कुल 14.38 लाख रुपये की जब्ती ने विभागीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। विजिलेंस की अगली कार्रवाई अब दोनों ऑडिटर्स द्वारा दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और जांच में मिलने वाले दस्तावेजों पर निर्भर करेगी। फिलहाल पूरी रकम जब्त कर उसके स्रोत का पता लगाने की प्रक्रिया जारी है।







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