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नारायणपुर में वैद्य सम्मेलन, दुर्लभ वनौषधियों के संरक्षण का संकल्प...

Aug 22
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

नारायणपुर :- छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड (छत्तीसगढ़ शासन, वन विभाग) की ओर से नारायणपुर वनमंडल द्वारा जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन का आयोजन नारायणपुर वनमंडल कार्यालय सभागार में किया गया। वैद्य सम्मेलन कार्यक्रम बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। तत्पश्चात वनमंडल अधिकारी वेंकटेश एम. जी. ने अध्यक्ष विकास मरकाम पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में वैद्य रतन रंजन धर, कज्जाराम गोटा, रूपसिंह, सुखदेव, सोमनाथ, फूलसिंह, अमृतलाल और हरिचंद सहित अन्य वैद्यों ने पारंपरिक जड़ी बूटियों के उपचार के ज्ञान को साझा किया साथ ही वैद्यों ने वन औषधियों के संरक्षण और जागरूकता के लिए नारायणपुर में हर्बल गार्डन निर्माण का आग्रह किया।

तद्उपरांत कार्यक्रम में बोर्ड के कंसल्टेंट अमित गुप्ता ने बोर्ड द्वारा संचालित वैद्यों के हितकारी सभी योजनाओ की जानकारी विस्तार से दी। उन्होंने बताया कि बोर्ड द्वारा छत्तीसगढ़ के वैद्यों के आर्थिक रूप से सक्षम न होने कारण उच्च गुणवत्ता की जड़ी-बूटियों को पिसने हेतु निःशुल्क पलवालाईजर मशीन वैद्यों के समूहों को उपलब्ध कराई जा रही है जिसका लाभ वैद्यगण समूह के माध्यम से ले सकते हैं। बोर्ड द्वारा वैद्यों के लिए विशेष रूप से हीलर हर्बल गार्डन योजना भी चलाई जा रही है, जिसके माध्यम से वैद्यों को उनकी ही बाड़ी में आम तौर पर उपयोग होने वाली वनौषधियों का छोटा सा उद्यान बना सकते हैं, जिसके लिए बोर्ड द्वारा आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग दिया जाता है, साथ ही बोर्ड द्वारा वैद्यों के निवास ग्राम में संचालित स्कूल में स्कूल हर्बल गार्डन तैयार करने तथा उसकी देखरेख करने के लिए तकनीकी एवं आर्थिक मदद भी प्रदान की जाती हैं तथा बोर्ड द्वारा वैद्यों की उपचार पद्धतियों का प्रमाणीकरण फब्प् के माध्यम से कराये जाने का संचालन किया जा रहा है।

तत्पश्चात नारायणपुर वनमंडल अधिकारी वेंकटेश एम. जी. ने अपने उदबोधन में बोर्ड द्वारा जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन नारायणपुर में आयोजित किये जाने धन्यवाद दिया। उन्होंने वैद्यों के आग्रह को स्वीकार करते हुए नारायणपुर में हर्बल गार्डन बनाने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि नारायणपुर वनमंडल में वनौषधियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए 3000 मबज में रोपण किया जा रहा हैं तथा वनौषधियों की रिपोज़िटरी भी बना रहा हैं एवं वैद्यों के ज्ञान का डॉक्यूमेंटेशन भी किये जाने की योजना हैं।


उद्बोधन की अगली कड़ी में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विकास मरकाम ने कहा कि मा. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वनमंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वैद्यों के उत्थान के लिए कार्य कर रहा हैं। उन्होंने वनौषधियों के संरक्षण और संवर्धन में वैद्यों से सहयोग का आव्वाहन किया, उन्होंने बताया कि रसना जड़ी जो विलुप्ति की कगार पर है वह नारायणपुर के छोटे डोंगर और बेनूर क्षेत्र के जंगलों में उपलब्ध है, इसी प्रकार से दहीमन जो लगभग विलुप्तप्राय हो चुका है वह भी नारायणपुर के जंगलों में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सभी दुर्लभ वनौषधियों का संरक्षण सरकार और वैद्यों की सामुहिक जिम्मेदारी है। बोर्ड भी विलुप्तप्राय 50 दुर्लभ वनौषधियों की पहचान कर उनके संरक्षण और संवर्धन के कार्य कर रहा है। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि आज अबूझमाड़ की पारंपरिक स्वास्थ्य एवं भोजन परंपरा पर रिसर्च करने विदेशों से भी अनुसंधानकर्ता आ रहे हैं, अब छत्तीसगढ़ की पारंपरिक स्वास्थ्य एवं भोजन परंपरा सहेजने की जिम्मेदारी वैद्यों की है।


कार्यक्रम में बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने वैद्यों से चर्चा कर उनकी छोटी-छोटी समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करने के लिए वनमंडल अधिकारी वेंकटेश एम. जी. को निर्देशित किया। कार्यक्रम के अंत में बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम के कर कमलों से वैद्य सम्मेलन में आए हुए सभी वैद्यों को सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। वैद्य सम्मेलन में नारायणपुर जिले के 25 वैद्य सहित 60 से 70 लोग शामिल हुए तथा उपवनमंडल अधिकारी हीरे सिंग उइके, प्रीति यादव एवं राजेश कश्यप परिक्षेत्र अधिकारी इंद्र कुमार यादव, भोगनाथ नायक, वर्षा कश्यप एवं भूषण सिंह ठाकुर नारायणपुर वनमंडल तथा बोर्ड के कर्मचारी उपस्थित रहे।

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