महासमुंद में अनूठी पहल: 350 से अधिक बालिकाओं और महिलाओं को स्वास्थ्य व सुरक्षा का पाठ, 101 कन्याओं का हुआ पूजन.....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-
महासमुंद के अंबेडकर भवन में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से एक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान लगभग 350 किशोरी बालिकाओं और माताओं ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम की शुरुआत 101 कन्याओं के पूजन और भोज के साथ की गई, जिसके बाद जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
समारोह का मुख्य उद्देश्य बेटियों के पारंपरिक पूजन को उनके वास्तविक संरक्षण, अधिकारों और बेहतर सेहत के संकल्प से जोड़ना था। विशेषज्ञों ने इस दौरान बालिकाओं के शारीरिक विकास, किशोरावस्था के बदलावों और मानसिक मजबूती पर खुलकर चर्चा की।
विभिन्न चिकित्सा संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। बालको मेडिकल सेंटर की चिकित्सकों ने सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों, बचाव के उपायों, एचपीवी टीकाकरण तथा समय पर स्क्रीनिंग के महत्व को समझाया। वहीं एम्स रायपुर की विशेषज्ञ ने माहवारी स्वच्छता और पोषण संबंधी सावधानियों पर जोर दिया। इसके अलावा, बाल मनोचिकित्सकों ने बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत, स्क्रीन टाइम के दुष्प्रभावों और मानसिक स्वास्थ्य के संतुलन पर अभिभावकों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक के जरिए भी समाज को बालिकाओं के अधिकारों और सुरक्षा का संदेश दिया गया।
आयोग की अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि बेटियों का सम्मान केवल किसी एक पर्व तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य के लिए सालभर प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बालिकाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप समय पर टीकाकरण करवाएं। कार्यक्रम के अंत में सभी ने बेटियों के संरक्षण और समाज में इस सकारात्मक संदेश को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे।






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