GRC की चौथी राज्य स्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ चेम्बर ने उठाए जीएसटी से जुड़े ज्वलंत मुद्दे...
जीआरसी (GRC) की चौथी राज्य स्तरीय बैठक में चेम्बर ने प्रमुखता से उठाए
उद्योग व व्यापार से जुड़े ज्वलंत जीएसटी मुद्दे |
प्र्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी के मार्गदर्शन एवं कोषाध्यक्ष निकेश बरड़िया के नेतृत्व में चेम्बर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य आयुक्त सीजीएसटी भोपाल जोन को सौंपा ज्ञापन |
वास्तविक क्रेता का आईटीसी ब्लॉक करने, ई-वे बिल में मामूली त्रुटि पर भारी पेनल्टी और चालू इकाइयों के बैंक खाते सीज करने पर जताई कड़ी आपत्ति |

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-
रायपुर :- छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी के कुशल मार्गदर्शन एवं चेम्बर कोषाध्यक्ष निकेश बरड़िया के नेतृत्व में चेम्बर के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समिति ( ळत्ब्) की बैठक (दिनांक 14-10-2026) के अवसर पर मुख्य आयुक्त (सीजीएसटी), भोपाल जोन को प्रदेश के व्यापारियों एवं उद्योगपतियों की जमीनी समस्याओं से संबंधित महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। बैठक में सीजीएसटी भोपाल जोन के मुख्य आयुक्त मानस आर. मोहंती (Chief Commissioner), प्रधान आयुक्त पराग सी. बोरकर (Principal Commissioner), संयुक्त आयुक्त अमित चंदेल, अरविंद कुमार, सोनल के. मिश्रा एवं भावना अली (Joint Commissioner), अपर आयुक्त योगेश यादव (Additional Commissioner), उपायुक्त पिंकी बास्की, नितिन गर्ग एवं प्रतिष्ठा ठाकुर (Deputy Commissioner) तथा राज्य कर आयुक्त पुष्पेंद्र के. मीना, विशेष आयुक्त तरन्नुम वर्मा उपस्थित रहे।

ज्ञापन में विशेष रूप से प्रदेश के स्टील, राइस मिल, प्लास्टिक एवं विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्रों सहित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को जीएसटी प्रशासन के कारण हो रही व्यावहारिक कठिनाइयों के निराकरण हेतु 6 प्रमुख मांगें व सुझाव मुख्य आयुक्त महोदय के समक्ष रखे गए:-
1. वास्तविक क्रेताओं (Bonafide Buyer) के आईटीसी ब्लॉक करने पर रोक:- सप्लाई चेन में किसी पिछले आपूर्तिकर्ता द्वारा टैक्स डिफॉल्ट करने पर बैंक चैनल से पूरा भुगतान करने वाले वास्तविक विनिर्माता/क्रेता का आईटीसी ब्लॉक (नियम 86।) करना और धारा 74 के तहत नोटिस देना अनुचित है। विभाग पहले मूल डिफॉल्टर से वसूली करे।
2. प्लास्टिक व विनिर्माण उद्योग हेतु रिफंड व्यवस्था (Inverted Duty Structure):- प्लास्टिक, पाइप्स व अन्य विनिर्माण इकाइयों की कार्यशील पूंजी (ॅवतापदह ब्ंचपजंस) को तरलता प्रदान करने हेतु नियम 89(5) के तहत कैपिटल गुड्स एवं इनपुट सेवाओं पर जमा क्रेडिट के रिफंड की स्पष्ट अनुमति दी जाए।
3. राइस मिलिंग (CMR) एवं सह-उत्पादों पर एकरूपता:- कस्टम मिलिंग के बाय-प्रोडक्ट्स (ब्रान, हस्क) और जॉब वर्क पर फील्ड अधिकारियों की अलग-अलग व्याख्याओं के कारण मिलर्स को मिल रहे पुराने नोटिसों पर रोक लगाते हुए केंद्रीय स्तर से एक स्पष्ट व एकरूप सर्कुलर जारी किया जाए।
4. ई-वे बिल में मामूली त्रुटियों पर 200% पेनल्टी का दुरुपयोग रोका जाए:- वाहन खराब होने या क्लर्क की साधारण मानवीय त्रुटि पर धारा 129 के तहत भारी जब्ती और 200ः पेनल्टी के बजाय सर्कुलर 64/38/2018 का पालन करते हुए केवल नाममात्र शास्ति (₹500-₹1000) ली जाए।
5. बैंक खातों की त्वरित कुर्की (क्त्ब्-22) पर रोक व सिंगल ऑडिट:- प्रारंभिक जांच स्तर पर चालू कारखानों के बैंक खाते फ्रीज करने से उद्योगों का संचालन ठप्प हो जाता है। इसे केवल बोगस फर्मों तक सीमित रखा जाए तथा बार-बार के नोटिसों से राहत हेतु वर्ष में एक बार ”संयुक्त इंटीग्रेटेड ऑडिट” व्यवस्था लागू हो।
6. GSTR-3B विलंब पर धारा 125 की अनुचित पेनल्टी रद्द हो:- धारा 47 के तहत लेट फीस जमा करने के बावजूद धारा 125 के तहत ₹50,000 तक की सामान्य शास्ति के नोटिस भेजना गैर-कानूनी है, जिस पर तुरंत रोक लगाई जाए।
मुख्य आयुक्त महोदय ने चेम्बर द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं को अत्यंत गंभीरता से सुना और सकारात्मक कार्रवाई का पूर्ण आश्वासन दिया। इस अवसर पर चेम्बर प्रदेश कोषाध्यक्ष निकेश बरड़िया, वाइस चेयरमेन सी.ए. चेतन तरवानी, कार्यकारी अध्यक्ष राजेश वासवानी, सी.ए. विजय गोयल प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।






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