यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित 'नौकरी और ट्रांसफर घोटाला' है...
फर्जी नियुक्ति और फर्जी ट्रांसफर का गिरोह बेखौफ काम कर रहा है - कांग्रेस...
भाजपा के कुशासन में प्रदेश दलालों और फर्जीवाड़े का अड्डा बन गया है...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से:-
रायपुर: प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि शिक्षा विभाग में फर्जी ट्रांसफर आदेश, उससे पहले बीज निगम में फर्जी नियुक्ति और स्वास्थ्य विभाग में फर्जी ट्रांसफर के मामले भाजपा सरकार की लचर प्रशासनिक व्यवस्था का स्पष्ट उदाहरण हैं। छत्तीसगढ़ में भाजपा राज के दौरान भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का खुला खेल चल रहा है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग में तीन दर्जन कर्मचारियों के फर्जी ट्रांसफर आदेश निकल गए हैं। कृषि विभाग के सबसे महत्वपूर्ण अंग 'बीज निगम' में धड़ल्ले से फर्जी नियुक्ति पत्र और फर्जी ट्रांसफर आदेश बांटे जा रहे हैं। एक तरफ छत्तीसगढ़ का बेरोजगार युवा नौकरियों के लिए सड़कों पर भटक रहा है, वहीं दूसरी तरफ बीज निगम में पैसे लेकर बैकडोर से फर्जी नियुक्तियों का सिंडिकेट चलाया जा रहा है। चूंकि बीज निगम सीधे तौर पर किसानों के हितों से जुड़ा है, इसलिए यह युवाओं के साथ धोखा और किसानों के साथ खुली गद्दारी है।
डिजिटल हस्ताक्षरों का दुरुपयोग और प्रशासनिक अव्यवस्था
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा सरकार राज्य में 'सुशासन' और 'ज़ीरो टॉलरेंस' का ढिंढोरा पीट रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि बीज निगम जैसी महत्वपूर्ण संस्था में महाप्रबंधक के डिजिटल हस्ताक्षर स्कैन कर उनका दुरुपयोग करते हुए फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में भी फर्जी ट्रांसफर के लेटर पैड खुलेआम बंट रहे हैं। हाल ही में बलौदाबाजार जिले में आरएमए (RMA) के फर्जी ट्रांसफर आदेश के मामले में दो बड़े भाजपा नेताओं की संलिप्तता भी उजागर हुई है। इस सरकार में प्रशासनिक निगरानी पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और फर्जी ट्रांसफर-नियुक्तियों का गिरोह बेखौफ होकर काम कर रहा है। भाजपा के इस कुशासन में पूरा प्रदेश दलालों और फर्जीवाड़े का अड्डा बन चुका है।
'ज़ीरो टॉलरेंस' नहीं, शत-प्रतिशत करप्शन
कांग्रेस संचार प्रमुख ने कहा कि साय सरकार में चारों तरफ 'फर्जीवाड़े की बहार' है। यह पहली बार नहीं है; इससे पहले भी गत 5 मार्च को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के नाम पर ऐसे ही फर्जी नियुक्ति आदेश जारी किए गए थे, जिसमें परिवहन, राजस्व, आपदा प्रबंधन, वन, जलवायु परिवर्तन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और स्कूल शिक्षा विभाग में भर्ती की अनुशंसा दिखाई गई थी। उस दौरान भी सचिव स्तर के विभागीय अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षरों का दुरुपयोग किया गया था। पूरे प्रदेश में एक संगठित फर्जीवाड़ा सिंडिकेट सक्रिय है, जिसे शासन-प्रशासन में बैठे बड़े चेहरों का सीधा संरक्षण प्राप्त है। यह महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित 'नौकरी और ट्रांसफर घोटाला' है। यह 'ज़ीरो टॉलरेंस' नहीं बल्कि 'शत-प्रतिशत करप्शन' वाली सरकार है, जहाँ मंत्री सो रहे हैं और दलालों का सिंडिकेट विभाग चला रहा है! कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार यह स्पष्ट करे कि अब तक नौकरी और ट्रांसफर के नाम पर बेरोजगार युवाओं से कितनी उगाही की गई है और इसका पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।






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