छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में फिर गरमाया मामला, एक और SP पर मंडराए कार्रवाई के बादल...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
छत्तीसगढ़ में पुलिस अधिकारियों द्वारा शस्त्र पूजन के दौरान कथित तौर पर फायरिंग करने के मामले तूल पकड़ते जा रहे हैं। हाल ही में राजनांदगांव की घटना के बाद, अब मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) वाई.पी. सिंह भी विवादों के घेरे में आ गए हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) की सक्रियता बढ़ गई है।
क्या है पूरा मामला ?
सामने आए वायरल वीडियो और तस्वीरों में एक पुलिस अधिकारी और उनके परिजन कथित तौर पर सरकारी हथियार के साथ नजर आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो शस्त्र पूजन के बाद का है, जिसमें सरकारी राइफल से कथित रूप से फायरिंग की गई। इस बात पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि नियमों के विपरीत किसी अधिकारी के परिवार के सदस्य को सरकारी हथियार के इस्तेमाल की अनुमति कैसे मिल सकती है।
हालांकि, इस वायरल वीडियो की समय-सीमा को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। विभागीय सूत्रों और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह वीडियो मौजूदा साल की बजाय पिछले वर्ष का होने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद इस प्रकार के मामलों के सार्वजनिक होने से प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला -
इससे पहले राजनांदगांव जिले में भी इसी तरह का एक प्रकरण सामने आया था, जिसमें एक अन्य एसपी का एके-47 से फायरिंग करते हुए वीडियो वायरल हुआ था। उस मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं और राष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा मानकों व तौर-तरीकों को लेकर सवाल खड़े हुए थे। उस प्रकरण में संबंधित अधिकारी को पहले ही स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया जा चुका है।
राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया -
इस ताज़ा मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। इसके अलावा विपक्षी नेताओं ने भी प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा हथियारों के उपयोग से जुड़े नियमों और जवाबदेही के मानकों पर कड़े सवाल उठाए हैं।
आगे की स्थिति -
फिलहाल इस बात की आधिकारिक पुष्टि की जा रही है कि वीडियो किस समय का है और उसमें उपयोग किया गया हथियार किस श्रेणी का था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन इन लगातार सामने आ रहे प्रकरणों ने पुलिस विभाग के भीतर अनुशासन और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।






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