राजधानी में मुश्किल से एक दो मैदान बचे है सरकार उनको भी बेच रही - कांग्रेस....
बीटीआई ग्राउंड में कमर्शियल रेसीडेंसियल प्रोजेक्ट का कांग्रेस विरोध करती है....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर: भाजपा सरकार द्वारा राजधानी के बीटीआई ग्राउंड में कमर्शियल एवं रेसिडेंशियल प्रोजेक्ट बनाए जाने का कांग्रेस ने कड़ा विरोध किया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि राजधानी में मुश्किल से एक-दो मैदान बचे हैं और सरकार उन्हें भी बेचने पर उतारू है। बीटीआई ग्राउंड शंकर नगर क्षेत्र के बीचों-बीच स्थित एकमात्र खुला मैदान है, जहाँ राजधानी के लोग सुबह-शाम सैर करने आते हैं और विभिन्न प्रकार के सामाजिक व सांस्कृतिक आयोजन किए जाते हैं। ऐसे में यहाँ कमर्शियल और रेसिडेंशियल प्रोजेक्ट बनाया जाना बिल्कुल गलत है।
राजधानी में खुले मैदानों की सबसे ज्यादा जरूरत है, इसलिए सरकार को बिल्डर बनने के बजाय अपने सामाजिक सरोकारों को निभाना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आगे कहा कि रायपुर में खुले मैदानों की कमी पहले से ही है। पहले स्कूलों के जो मैदान हुआ करते थे, उन्हें भाजपा की पूर्ववर्ती सरकारों ने दुकानें और विभिन्न निर्माण करवाकर खत्म कर दिया है। साइंस कॉलेज मैदान, सप्रे स्कूल, आर.डी. तिवारी स्कूल और मोवा स्कूल जैसे सरकारी स्कूलों के मैदान तो पहले ही दम तोड़ चुके हैं। अब एकमात्र बचे बीटीआई ग्राउंड को समाप्त किया जाना पूरी तरह से अनुचित है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने यह भी कहा कि बीटीआई ग्राउंड वहाँ के बच्चों के खेलकूद के लिए आरक्षित है, ऐसे में सरकार इसका व्यावसायिक उपयोग कैसे कर सकती है? सरकार पैसा कमाने की होड़ में राजधानी के आम आदमी की नागरिक सुविधाओं को छीनने का काम न करे। सरकार यह स्पष्ट करे कि यदि बीटीआई ग्राउंड पर कमर्शियल और रेसिडेंशियल निर्माण होता है, तो इस ग्राउंड का विकल्प सरकार के पास क्या है? राजधानी में ऐसे कितने खुले मैदान उपलब्ध हैं, जहाँ नागरिक अपनी सामान्य खेलकूद, सामाजिक, सार्वजनिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ आसानी से कर सकें?






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