नई रोशनी से चमका सपेरा बस्ती का भविष्य: बाल चौपाल की पहल से 21 बच्चों ने थामा स्कूल का रास्ता...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
तिल्दा विकासखंड के ग्राम सिनोधा की सपेरा बस्ती में अब किलकारियों के साथ पढ़ाई की गूंज भी सुनाई देने लगी है। कभी शिक्षा से कोसों दूर और दस्तावेजों के अभाव में शासकीय योजनाओं से वंचित रहने वाले 21 बच्चों की जिंदगी ने एक नई करवट ली है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अनूठी पहल 'बाल चौपाल' ने इन बच्चों के जीवन में उजाला भर दिया है।
यह प्रेरक सफर 10 जुलाई को सिनोधा की सपेरा बस्ती में लगी बाल चौपाल से शुरू हुआ था। चौपाल के दौरान यह बात सामने आई कि अभावों और पिछड़े परिवेश के कारण यहां के कई बच्चों के पास न तो आधार कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज हैं और न ही वे स्कूल की दहलीज तक पहुंच पा रहे हैं। कई अभिभावक भी बच्चों को पढ़ाने के पक्ष में नहीं थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने इसे मिशन के रूप में लिया और 17 जुलाई को औपचारिक प्रकरण दर्ज कर कागजी अड़चनों को दूर करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
विभिन्न विभागों और शिक्षकों के समन्वय से समझाइश का दौर चला, जिसके परिणामस्वरुप 20 बच्चों का स्कूल में दाखिला हो गया। हालांकि, बस्ती का एक बच्चा सिद्धू और उसके घरवाले अभी भी पढ़ाई के लिए राजी नहीं थे। हार न मानते हुए आयोग ने निरंतर संवाद जारी रखा। आख़िरकार सतत प्रयासों का असर हुआ और सिद्धू का भी स्कूल में प्रवेश हो गया। पिछले कुछ दिनों से नियमित स्कूल जा रहा सिद्धू अब बाकी बच्चों की तरह उत्साह के साथ शिक्षा ग्रहण कर रहा है।
चौथी सुनवाई के दौरान इस सफलता पर विस्तार से चर्चा हुई। आयोग प्रमुख वर्णिका शर्मा ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी और सिद्धू से फोन पर सीधी बातचीत कर उसे निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उत्कृष्ट कार्य के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी लीलाधर सिन्हा को आयोग कार्यालय में सम्मानित भी किया गया।
इस मौके पर आयोग प्रमुख वर्णिका शर्मा ने कहा कि सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां या दस्तावेजों की कमी किसी भी बच्चे के विकास में दीवार नहीं बननी चाहिए। बाल चौपाल का असल मकसद कागजी औपचारिकताएं पूरी करना नहीं, बल्कि अंतिम छोर पर खड़े बच्चे के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों और शिक्षकों के सामूहिक सहयोग से मिली इस कामयाबी ने साबित कर दिया है कि सच्ची लगन और संवेदनशील प्रयासों से समाज की तस्वीर पूरी तरह बदली जा सकती है।
सपेरा बस्ती में बदलाव: तिल्दा के सिनोधा गांव में बाल चौपाल के जरिए शिक्षा से वंचित बच्चों को मिला नया जीवन।
21 बच्चों का दाखिला: दस्तावेजों की कमी और अभिभावकों की अनिच्छा को दूर कर सभी बच्चों का स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित हुआ।
विशेष सफलता: अंतिम बच्चे सिद्धू की जिद और हिचकिचाहट को काउंसलिंग से दूर कर उसे नियमित स्कूल भेजा गया।






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