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धान और अरहर की फसल पर रोग-कीटों का खतरा.....

52 minutes ago
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

छत्तीसगढ़:- आगामी दिनों में मध्यम बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना को देखते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र, बालोद ने किसानों को धान एवं अरहर की फसल में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। केन्द्र ने किसानों से कहा है कि कीटनाशक एवं कवकनाशी का छिड़काव मौसम साफ रहने पर ही करें। साथ ही दवाओं का उपयोग फसल में रोग-कीट की वास्तविक स्थिति और आर्थिक क्षति स्तर के आधार पर करने की सलाह दी गई है।




















धान की फसल में इन बातों का रखें ध्यान

वर्तमान में धान की फसल गभोट एवं बाली निकलने की अवस्था में है। गभोट अवस्था में नत्रजन की तीसरी मात्रा के रूप में 50 किलोग्राम यूरिया प्रति हेक्टेयर की दर से टॉप ड्रेसिंग की जा सकती है। धान में भूरा माहू का प्रकोप दिखाई देने पर पाइमेट्रोजिन 50 डब्ल्यू.जी. 300 ग्राम अथवा थायामेथोक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यू.जी. 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। गंधी बग के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस.एल. 125 मिलीलीटर अथवा थायामेथोक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यू.जी. 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जा सकता है।


तना छेदक की निगरानी के लिए 2 से 3 फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ लगाने की सलाह दी गई है। अधिक प्रकोप की स्थिति में 8 से 10 फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ तक लगाए जा सकते हैं। प्रकोप होने पर कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 50 डब्ल्यू.पी. 1 किलोग्राम अथवा क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।


पत्ती मोड़क (चितरी) का प्रकोप होने पर जब एक से दो पत्तियां प्रति पौधा प्रभावित हों, तब फिप्रोनिल 5 एस.सी. 800 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।


धान में झुलसा रोग (ब्लास्ट) के लक्षण दिखाई देने पर ट्राइफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन 25 प्रतिशत, टेबुकोनाजोल 50 प्रतिशत 200 ग्राम अथवा एजॉक्सीस्ट्रोबिन 11 प्रतिशत, टेबुकोनाजोल 18.3 प्रतिशत, एस.सी. 750 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की अनुशंसित मात्रा में 500 लीटर पानी के साथ किसी एक कवकनाशी का छिड़काव करें। आवश्यकता होने पर 12 से 15 दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव किया जा सकता है।


अरहर की फसल में जल निकासी पर दें विशेष ध्यान

अरहर की फसल में वर्तमान समय में तना अंगमारी (स्टेम ब्लाइट) रोग की निगरानी करने की सलाह दी गई है। रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर ताम्रयुक्त कवकनाशी 1.25 किलोग्राम अथवा मेटालेक्सिल एम.जेड. 750 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव किया जा सकता है। आवश्यकता के अनुसार 10 से 12 दिन के अंतराल पर 2 से 3 बार छिड़काव किया जा सकता है। आगामी दिनों में वर्षा की संभावना को देखते हुए किसानों को अरहर के खेत में अतिरिक्त पानी के निकास की उचित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है। कवकनाशी का छिड़काव केवल मौसम साफ रहने पर ही किया जाए।


दवाओं के उपयोग में बरतें सावधानी

कृषि विज्ञान केन्द्र, बालोद ने किसानों से अपील की है कि किसी भी कीटनाशक या कवकनाशी का उपयोग फसल में रोग-कीट की वास्तविक स्थिति एवं आर्थिक क्षति स्तर को ध्यान में रखकर ही करें। कृषि दवाओं का उपयोग करते समय उनके लेबल पर दिए गए निर्देशों का पालन करें। वर्षा की संभावना को देखते हुए छिड़काव से पहले मौसम की स्थिति अवश्य देख लें। कृषि विज्ञान केन्द्र, बालोद ने किसानों के हित में जारी इस सलाह के माध्यम से फसल की सुरक्षा के साथ-साथ अनावश्यक दवा के उपयोग से बचने और कृषि लागत को नियंत्रित रखने पर भी जोर दिया है।


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