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देशभर के प्रदर्शन मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र समेत 7 राज्यों को भेजा नोटिस....

Jul 28
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान संसद मार्च में पुलिस कार्रवाई से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई | मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच के सामने याचिकाकर्ताओं ने बताया कि यह मामला सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश, नागपुर और बिहार में भी इसी तरह की घटनाएं हुई हैं, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पैलेट गन के इस्तेमाल, इलेक्ट्रिक बैटन, नाबालिगों की हिरासत और पुलिस की सिविल ड्रेस में हिंसा जैसे कई गंभीर आरोपों पर सख्त टिप्पणी की और कहा कि इन सभी मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए |


इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों को कोर्ट से राहत मिली है, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि फिलहाल FIR पर दंडात्मक कार्रवाई न की जाए | इसके साथ ही केंद्र समेत सात राज्यों को नोटिस जारी किया गया है | याचिकाकर्ताओं के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट को बताया कि यह पूरे देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा मामला है और सिर्फ दिल्ली की घटना नहीं है | मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सभी याचिकाओं में कुछ समान आरोप देखने को मिले हैं, इनमें एक 19 साल के लड़के की आंखों की रोशनी पैलेट गन के इस्तेमाल से जाने का मामला है, इसके अलावा इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल की शिकायत भी है | एक युवती को गंभीर चोट लगने के बाद आईसीयू में भर्ती कराया गया, वकीलों पर हमले की भी घटना सामने आई है और एक मीडियाकर्मी पर बेरहमी से हमला किया गया, इसके अलावा सिविल ड्रेस यानी बिना वर्दी के पुलिसकर्मियों द्वारा हिंसा करने के आरोप भी लगाए गए हैं |


मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन था, जिसमें कुछ मांगें उठाई गई थीं और यह संविधान के दायरे में था | उन्होंने कहा कि ऐसे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में अक्सर कुछ अनचाहे लोग शामिल हो जाते हैं जो अपने एजेंडे के साथ आते हैं और बाद में खुद ही आयोजक जैसा व्यवहार करने लगते हैं, दूसरी तरफ पुलिसकर्मियों के परिवारों की तरफ से भी याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें कहा गया है कि पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया गया |वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट को बताया कि एक वीडियो में एक सहायक उप निरीक्षक खुद एक कार के शीशे तोड़ते हुए दिखाई दे रहा है, उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी ऊंचे स्तर तक तय होनी चाहिए, वरना पुलिस को लगेगा कि वे बच निकलेंगे |


वरिष्ठ वकील शादान फरासत ने बताया कि उन पुलिसकर्मियों के पास भी नाम की पट्टी नहीं थी जो वर्दी में मौजूद थे, बिहार से जुड़े मामले में वरिष्ठ वकील शादान फरासत ने कहा कि वहां हिंसा का स्तर दिल्ली से भी ज्यादा रहा है और इसकी अखिल भारतीय स्तर पर जांच होनी चाहिए | उन्होंने बताया कि बिहार सरकार ने एफआईआर वापस लेने का दावा किया है, लेकिन 140 से ज्यादा लोग अब भी हिरासत में हैं, जिनमें ज्यादातर 16 से 18 साल के नाबालिग हैं और एक बच्चा तो सिर्फ 13 साल का है, इन नाबालिगों को 40 घंटे से ज्यादा समय बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया |


वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने बताया कि जुनैद मलिक नाम के एक युवक को, जो खाना बांटने आया था, उठाकर आंखों पर पट्टी बांधकर मसूरी हाईवे पर छोड़ दिया गया | उनके परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की गई. वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि जंतर मंतर पर सुबह चार बजे पत्थरों से भरा एक ट्रक लाया गया था, जो दिल्ली पुलिस के कई घेरों को पार करके अंदर आया. वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि अगर पुलिस को यह नहीं पता कि ट्रक कैसे अंदर आया, तो यह और भी सवाल खड़े करता है |


दीवान ने वीडियो और सीसीटीवी फुटेज के संरक्षण और चेहरा पहचानने वाली तकनीक से जुड़े डेटा का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इस डेटा का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों की प्रोफाइलिंग के लिए नहीं होना चाहिए | जस्टिस बागची ने पुलिसकर्मियों के पास सुरक्षा उपकरण न होने पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुरक्षा उपकरण आक्रामक उपकरणों से ज्यादा जरूरी हैं | वरिष्ठ वकील एएम सिंघवी ने राज्यवार घटनाओं का पूरा ब्यौरा कोर्ट में पेश किया मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सबसे संयमित शब्दों में भी कहा जाए तो स्वतंत्र जांच की जरूरत साफ नजर आती है और इसके लिए एक उच्च स्तरीय समिति या एसआईटी बनाई जाएगी |


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