2030 तक मलेरिया मुक्त होगा देश: पोलियो और कोविड की तर्ज पर लड़नी होगी जंग - संजीव कुमार झा
वेक्टर जनित रोगों के नियंत्रण की रणनीतियों पर राज्यों ने साझा किए अनुभव...
GFATM राज्यों की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक में मलेरिया उन्मूलन, निगरानी और प्रभावी कार्यप्रणालियों पर मंथन...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर, देश को वर्ष 2030 तक मलेरिया और अन्य मच्छर जनित बीमारियों से पूरी तरह मुक्त करने के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ की राजधानी में एक बड़ा महा-मंथन शुरू हो गया है।
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 28 से 30 सितंबर तक चलने वाली इस तीन दिवसीय GFATM क्षेत्रीय समीक्षा बैठक (IMEP-3) में कई राज्यों के प्रतिनिधि, WHO के विशेषज्ञ और बड़े स्वास्थ्य अधिकारी जुटे हैं। इस आयोजन का मुख्य फोकस अलग-अलग राज्यों के जमीनी अनुभवों, सफल रणनीतियों और नई तकनीकों को एक-दूसरे से साझा कर बीमारियों के खात्मे की दिशा में काम करना है।

बैठक को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के आयुक्त-सह-संचालक संजीव कुमार झा ने दो टूक शब्दों में कहा कि आज के दौर में हेल्थकेयर तकनीक काफी उन्नत हो चुकी है, इसलिए मलेरिया के मामलों में कोई भी बढ़ोतरी अब स्वीकार नहीं की जा सकती। पिछले एक दशक में छत्तीसगढ़ में मलेरिया के मामलों में आई भारी गिरावट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह देश ने पोलियो को जड़ से खत्म किया और कोविड-19 महामारी का डटकर मुकाबला किया, ठीक उसी तरह अब मलेरिया के खिलाफ भी एकजुट होकर निर्णायक जंग लड़नी होगी। संजीव कुमार झा ने इस बैठक को विभिन्न राज्यों की बेहतरीन कार्यप्रणालियों और नवाचारों को एक-दूसरे से सीखने का सबसे उपयुक्त मंच बताया।

वहीं, नई दिल्ली से आए राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र के अपर संचालक डॉ. प्रणब ज्योति भुइयां ने 2030 तक मलेरिया उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य की याद दिलाते हुए राज्यों के लगातार प्रयासों को बेहद अहम बताया। उन्होंने इस बात की विशेष सराहना की कि बीते वर्ष की तुलना में छत्तीसगढ़ में मलेरिया के मरीजों की संख्या में काफी बड़ी कमी दर्ज की गई है, जो राज्य के प्रभावी कदमों का सीधा प्रमाण है।

जमीनी स्तर पर काम करने वाले योद्धाओं का हुआ सम्मान -
इस अहम आयोजन में मलेरिया नियंत्रण के मोर्चे पर दिन-रात काम करने वाले जमीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, मितानिन प्रशिक्षकों और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया। मंच पर मौजूद सभी विशेषज्ञों ने माना कि समुदाय में जागरूकता फैलाने, सर्विलांस करने और समय पर इलाज सुनिश्चित करने में इन फील्ड वर्कर्स की भूमिका सबसे बड़ी है।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय कुष्ठ प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (RLTRI) रायपुर के संचालक डॉ. संदीप जोगदंड, ICMR-NIRTH जबलपुर के संचालक डॉ. प्रवीण कुमार भारती और राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. घनाराम रावटे समेत कई प्रमुख विशेषज्ञ मौजूद रहे। इस तीन दिवसीय कार्यशाला से निकलने वाले निष्कर्ष 2030 के लक्ष्य को हासिल करने में मील का पत्थर साबित होंगे।






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