सब्जियों की खेती से आत्मनिर्भरता की ओर, 'बिहान' योजना ने दिखाई राह...
- ANIS LALA DANI

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ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
रायपुर :- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘बिहान’ योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। समूहों के माध्यम से महिलाएं ऋण, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग प्राप्त कर कृषि सहित विभिन्न गतिविधियों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रही हैं। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के सकालो ग्राम पंचायत की कल्पना सिंह की कहानी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है।
डेढ़ लाख के ऋण से शुरू किया कृषि कार्य मां महामाया महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष कल्पना सिंह ने समूह के माध्यम से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर कृषि कार्य शुरू किया। उन्होंने इस राशि का उपयोग खीरे की खेती के लिए किया। वर्तमान में उनके खेत में खीरे की तुड़ाई चल रही है और फसल से उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है। कल्पना सिंह हर वर्ष मौसम के अनुसार अलग-अलग फसलों और सब्जियों की खेती करती हैं। इनमें बैंगन, टमाटर, खीरा, तरबूज सहित अन्य फसलें शामिल हैं।
अलग-अलग कृषि गतिविधियों को अपनाने से उन्हें आय के विविध स्रोत मिले हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। कृषि ने दिखाई ‘लखपति दीदी’ बनने की राह कल्पना सिंह बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से समय-समय पर ऋण लेकर अलग-अलग सब्जियों की खेती करने से उनकी आमदनी में लगातार वृद्धि हुई है। मेहनत और नियमित कृषि गतिविधियों के बल पर वे अब ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं और इस उपलब्धि को आगे बढ़ाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं।
वे कहती हैं कि बिहान से जुड़ने के बाद महिलाओं को अपनी क्षमता पहचानने और उसे आजीविका में बदलने का अवसर मिला है। समूह के माध्यम से महिलाएं आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर परिवार की आय बढ़ाने के साथ स्वयं भी आत्मनिर्भर बन रही हैं। कल्पना सिंह ने महिलाओं को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग और ऋण की सुविधा ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।
आज वे आत्मविश्वास के साथ कृषि कार्य कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में अपना योगदान दे रही हैं। कल्पना सिंह की कहानी इस बात की मिसाल है कि स्व-सहायता समूह का साथ, ऋण की सुविधा और मेहनत का हुनर मिलकर ग्रामीण महिला को आर्थिक रूप से सशक्त बना सकता है। खेत में लहलहाती सब्जियों के साथ उनके आत्मविश्वास की फसल भी तैयार हो रही है-जो उन्हें आत्मनिर्भरता और समृद्धि की नई राह पर आगे बढ़ा रही है।




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