google.com, pub-3310156774694367, DIRECT, f08c47fec0942fa0
top of page
WhatsApp Image 2025-09-10 at 15.54_edite
ADN FILMS POSTER

BREAKING ADN NEWS

WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.10.10.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (2).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31 (1).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (1).jpeg

शिक्षक दिवस: बगिया के छोटे से स्कूल से शुरू हुआ था सीएम साय का सफर...

Sep 5
5 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

रायपुर:- शिक्षक दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी गुरुजनों के नाम एक आत्मीय पत्र लिखकर उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। इस पत्र में मुख्यमंत्री ने अपने विद्यार्थी जीवन की यादों, बचपन के संघर्षों और शिक्षा हासिल करने के दौरान सामने आई चुनौतियों को साझा किया। साथ ही उन्होंने आज की बदलती शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए शिक्षकों से हर बच्चे की प्रतिभा पहचानने और पीछे छूट रहे विद्यार्थियों का हाथ थामने की अपील की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जीवन में व्यक्ति कितना भी आगे बढ़ जाए, अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव कभी कम नहीं होता। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर बताया कि उनके जीवन में भी गुरुजनों से मिली सीख और संस्कार ने कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का हौसला दिया।


बगिया के छोटे स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई:

मुख्यमंत्री ने पत्र में अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गांव के एक सामान्य किसान परिवार में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से शुरू हुई। उनके जीवन में बचपन से ही कई कठिन परिस्थितियां आईं। जब वे करीब दस वर्ष के थे और चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। कम उम्र में ही परिवार, खेती और छोटे भाइयों की जिम्मेदारियां उनके जीवन का हिस्सा बन गईं। गांव में पांचवीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें कुनकुरी जाना पड़ा। वहां उन्होंने लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक छोटे से कमरे में रहकर पढ़ाई की। आगे पढ़ने की इच्छा होने के बावजूद पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वे अपनी शिक्षा जारी नहीं रख सके। इसके बाद उन्होंने खेती की जिम्मेदारी संभाली और अपने छोटे भाइयों की पढ़ाई को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।


उस दौर में शिक्षा हासिल करना आसान नहीं था:

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके विद्यार्थी जीवन के समय ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा तक पहुंच आज की तरह आसान नहीं थी। दूर स्थित स्कूल, सीमित परिवहन साधन, पढ़ाई के संसाधनों की कमी और आर्थिक परेशानियां कई बच्चों के सामने बड़ी चुनौती थीं। उन्होंने कहा कि उस समय किसी गांव के बच्चे के लिए बेहतर शिक्षा हासिल करना अपने आप में संघर्ष था। आज जब वे मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश के बच्चों की शिक्षा और भविष्य से जुड़े फैसलों में भूमिका निभाते हैं, तो उन्हें अपने बचपन के वे दिन और भी ज्यादा याद आते हैं।


स्लेट-तख्ती से स्मार्ट क्लास तक बदली शिक्षा:

मुख्यमंत्री साय ने अपने पत्र में छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में आए बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी ने स्लेट, तख्ती और चॉक से पढ़ाई शुरू की थी, जबकि आज प्रदेश के बच्चे स्मार्ट क्लास और डिजिटल माध्यमों के जरिए शिक्षा हासिल कर रहे हैं। आज विद्यार्थियों को दुनिया भर के ज्ञान और सूचनाओं तक पहुंच मिल रही है। विज्ञान, तकनीक और डिजिटल संसाधनों ने सीखने के तरीके को काफी बदल दिया है। दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में भी शिक्षा की सुविधाओं का विस्तार हुआ है। साय ने कहा कि शिक्षा के साधन और तकनीक भले ही बदल गए हों, लेकिन शिक्षा की बुनियाद में शिक्षक की भूमिका आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।


शिक्षक सिर्फ पढ़ाता नहीं, भविष्य भी गढ़ता है:

मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक बच्चों को जानकारी दे सकती है और किताबें ज्ञान दे सकती हैं, लेकिन किसी बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाने और उसकी प्रतिभा पहचानने का काम एक संवेदनशील शिक्षक ही बेहतर तरीके से कर सकता है। एक शिक्षक बच्चे को केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाता, बल्कि उसके व्यक्तित्व और संस्कारों को भी आकार देता है। कई बार बच्चे को खुद अपनी क्षमता का अंदाजा नहीं होता। ऐसे में शिक्षक की पारखी नजर उसकी प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा दे सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक का प्रोत्साहन भरा एक वाक्य भी किसी विद्यार्थी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।


किसी बच्चे की परिस्थिति उसके सपनों की सीमा न बने:

साय ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि आर्थिक अभाव, दूरस्थ क्षेत्र या अन्य परिस्थितियों के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई और उसके सपने बाधित न हों। कोई बच्चा सिर्फ इसलिए पीछे न रह जाए क्योंकि उसका जन्म किसी छोटे गांव या वनांचल क्षेत्र में हुआ है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप छत्तीसगढ़ में शिक्षा को अधिक सहज, आधुनिक और व्यावहारिक बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में सीखने के अवसर बढ़ाने के साथ कौशल आधारित और व्यावहारिक शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।


बस्तर में फिर सुनाई दे रही स्कूलों की घंटी:

मुख्यमंत्री ने बस्तर का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे क्षेत्रों में भी अब स्कूलों की घंटियां सुनाई दे रही हैं, जहां परिस्थितियों के कारण लंबे समय तक विद्यालय प्रभावित रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा में बदलाव सिर्फ स्कूल की इमारत, तकनीक या सुविधाओं तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने का समान अवसर देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका सपना ऐसा छत्तीसगढ़ बनाने का है, जहां किसी बच्चे की परिस्थितियां उसके सपनों की सीमा तय न करें।


हर बच्चे में छिपी है कोई न कोई प्रतिभा:

शिक्षकों से आग्रह करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कक्षा में बैठा प्रत्येक बच्चा अपने भीतर कई संभावनाएं लेकर आता है। कोई आगे चलकर वैज्ञानिक, खिलाड़ी, डॉक्टर, किसान, शिक्षक, कलाकार या जनसेवक बन सकता है। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चों को अपनी क्षमता का पता नहीं होता, लेकिन शिक्षक उनकी प्रतिभा को पहचान सकते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देकर उनके सपनों को नई दिशा दी जा सकती है।


पीछे छूट रहे बच्चों का हाथ थामें शिक्षक:

शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के शिक्षकों से खास तौर पर उन बच्चों का साथ देने की अपील की, जो अभाव, संकोच या किसी अन्य कारण से पीछे रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक का थोड़ा सा विश्वास भी किसी बच्चे के पूरे जीवन की दिशा बदल सकता है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चों के आत्मविश्वास, व्यक्तित्व, संस्कार और क्षमताओं का विकास करना भी होना चाहिए।


गुरु-शिष्य का रिश्ता हमेशा रहेगा खास:

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि समय के साथ स्कूल बदलेंगे, पढ़ाने के तरीके बदलेंगे और आधुनिक तकनीक शिक्षा को नए रूप देगी, लेकिन गुरु और शिष्य के बीच विश्वास, स्नेह और संस्कार का रिश्ता हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस के अवसर पर वे केवल मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि गांव के एक छोटे स्कूल में पढ़ने वाले उस विद्यार्थी के रूप में भी अपने गुरुजनों के प्रति कृतज्ञ हैं, जिसने शिक्षकों से मिली सीख और संस्कारों को जीवन की पूंजी माना। साय ने प्रदेश के शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि मिलकर ऐसा छत्तीसगढ़ बनाया जाए, जहां हर स्कूल सपनों का द्वार और हर कक्षा संभावनाओं का संसार बने। उन्होंने सभी गुरुजनों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, सुखी और यशस्वी जीवन की कामना की।


Comments


© 2018 by Anis lala dani. Proudly created with breakingadnnews.com

  • Subscribe Channale
bottom of page
naver-site-verification: navere8d42c0359e3e135363406d5b6093c27.html