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सुप्रीम कोर्ट का NEET प्रदर्शनकारियों को लेकर सख्त रुख.....

Aug 3
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों के मामले में सोमवार को स्पष्ट किया कि गंभीर आपराधिक इतिहास वाले लोगों बख्शा नहीं जाएगा। अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और अन्य राज्यों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे बंद करने की भी छूट दी। विरोध प्रदर्शनों में छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा, "यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि ज्यादती करने वाले पुलिस अधिकारी या प्रदर्शनकारियों के बीच आने वाले किसी आपराधिक तत्व को बख्शा जाएगा।"


कोर्ट ने कहा कि वह पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों की जांच के लिए पुलिस अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाने या किसी रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली समिति बनाने पर विचार कर रहा है। बेंच ने टिप्पणी की, "हमारे मन में दो बातें हैं। एक तो जांच के लिए पुलिस अधिकारियों की एसआईटी बनाना या किसी रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली समिति बनाना।" याचिकाकर्ताओं ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया। इसके बाद बेंच ने कहा कि वह एक व्यापक प्रोटोकॉल तय करेगी कि इनका इस्तेमाल कब और कैसे किया जा सकता है। बेंच ने कहा, "हम एक पूरा प्रोटोकॉल बनाना चाहते हैं कि इसका इस्तेमाल कैसे और कहाँ किया जा सकता है।"


कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली (एनसीटी) और कोई भी अन्य राज्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर बंद करने या वापस लेने के लिए स्वतंत्र है। इसके साथ ही, बेंच ने अपने 28 जुलाई के आदेश को स्पष्ट किया, जिसमें कहा गया था कि पुलिस आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमा जारी रख सकती है। कोर्ट ने साफ किया कि 'आपराधिक रिकॉर्ड' शब्द का मतलब गंभीर और जघन्य अपराधों से है। आखिरकार, कोर्ट ने कोई भी आदेश देने से पहले अलग-अलग राज्यों से जवाब का इंतजार करने का फैसला किया। कोर्ट ने इस मामले पर विचार करने के लिए 18 अगस्त की तारीख तय की।

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