रायपुर में धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2026 पर विशेष जागरूकता शिविर, सैकड़ों पास्टर और मसीही अगुवे हुए शामिल...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर। राजधानी के सेंट पॉल कैथेड्रल परिसर में हाल ही में मसीही समाज के अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और दायित्वों को लेकर एक विस्तृत विमर्श और जागरूकता कार्यक्रम संपन्न हुआ। जागरण जनसेवा फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज के लोगों को नए कानून की सही जानकारी देना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा महाराष्ट्र और लेह-लद्दाख से भी बड़ी संख्या में पास्टर, प्रचारक और धार्मिक प्रतिनिधि जुटे। कुल मिलाकर लगभग छह से सात सौ लोगों की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक व्यापक रूप दिया। कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक प्रार्थना और आराधना के साथ हुई, जिसमें नैतिक मूल्यों, भाईचारे और समाज सेवा पर विशेष जोर दिया गया।
कानूनी पहलुओं और दायित्वों पर खुली चर्चा -
कार्यशाला के दौरान कानूनी विशेषज्ञों की टीम ने धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2026 के विभिन्न प्रावधानों और विधिक प्रक्रियाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने समझाया कि किसी भी कानून का सही पालन किस प्रकार किया जा सकता है और नागरिक कर्तव्यों के प्रति सजग रहना क्यों आवश्यक है। इस दौरान उपस्थित लोगों ने अपने सवाल भी रखे, जिनका विधिविदों द्वारा संतोषजनक समाधान किया गया।
मसीही जीवन और राष्ट्र निर्माण को लेकर वक्ताओं ने साझा किया कि एक अनुशासित और आदर्श जीवन केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सच्चाई, ईमानदारी और देश के विकास में सकारात्मक योगदान से भी जुड़ा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के कार्यों में मसीही समाज की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने का आह्वान भी इस मंच से किया गया।
सामूहिक संकल्प के साथ समापन -
कार्यक्रम के अंत में सभी ने देश के संविधान और कानूनों का पूर्ण सम्मान करने, समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने तथा राष्ट्र निर्माण में पूरी निष्ठा से जुटने का संकल्प लिया। अंत में राष्ट्रगान के साथ इस बड़े आयोजन का समापन किया गया।






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