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तस्करी की गंभीर चुनौती, SSB कैंप के पास कथित अवैध गोदामों का खुलासा...

Sep 2
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

भारत-नेपाल सीमा :- भारत-नेपाल की खुली सीमा पर तस्करी की समस्या लगातार गंभीर चुनौती बनी हुई है। अब सीमा क्षेत्र में एसएसबी कैंप के आसपास कथित अवैध गोदामों की मौजूदगी ने सुरक्षा व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि इन गोदामों का इस्तेमाल खाद की अवैध आवाजाही के साथ गांजा और ब्राउन शुगर जैसे मादक पदार्थों की तस्करी के लिए किया जा रहा है। सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय नेटवर्क दोनों देशों के बीच आवाजाही की सुविधा का फायदा उठाकर अपना कारोबार चला रहे हैं।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि एसएसबी की मौजूदगी वाले संवेदनशील इलाके के आसपास बिना पर्याप्त निगरानी के गोदाम कैसे संचालित हो रहे हैं। सीमा से सटे क्षेत्रों में सामान रखने के लिए बनाए गए ऐसे ठिकानों से तस्करों को माल जमा करने और मौका मिलते ही उसे दूसरी तरफ पहुंचाने में आसानी होती है। यदि इनका संचालन बिना जरूरी अनुमति या दस्तावेजों के हो रहा है तो स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में खाद की तस्करी पहले से चिंता का विषय रही है।


किसानों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली सब्सिडी वाली खाद की सीमा पार अवैध बिक्री से स्थानीय बाजार में इसकी उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका रहती है। तस्कर कथित तौर पर पहले खाद को सीमा के नजदीक जमा करते हैं और फिर सुविधाजनक समय देखकर उसे नेपाल की ओर पहुंचाने की कोशिश करते हैं।


मामला केवल खाद तक सीमित नहीं है। गांजा और ब्राउन शुगर जैसे मादक पदार्थों की अवैध आवाजाही ने स्थिति को ज्यादा गंभीर बना दिया है। नशे के नेटवर्क से जुड़े लोग खुली सीमा और छोटे रास्तों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों के लिए मुख्य मार्गों के साथ गांवों, खेतों और दूसरे संपर्क रास्तों पर नजर रखना भी बड़ी चुनौती बन जाता है। भारत और नेपाल के नागरिकों की सामान्य आवाजाही के लिए दोनों देशों की खुली सीमा महत्वपूर्ण है। लेकिन इसी व्यवस्था का दुरुपयोग तस्कर भी करने की कोशिश करते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती यह है कि सामान्य नागरिकों को परेशानी पहुंचाए बिना संदिग्ध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए।


अवैध गोदामों का मुद्दा सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर जमीन और भवनों के इस्तेमाल की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह पता लगाना जरूरी है कि गोदाम किसके नाम पर हैं, उनमें किस तरह का सामान रखा जाता है और माल की खरीद-बिक्री से संबंधित वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। संदिग्ध आर्थिक लेन-देन और परिवहन नेटवर्क की जांच से भी तस्करी की पूरी श्रृंखला तक पहुंचा जा सकता है।


सीमा सुरक्षा केवल एसएसबी की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है। स्थानीय पुलिस, प्रशासन, नारकोटिक्स से जुड़ी एजेंसियों और अन्य विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। अवैध भंडारण स्थलों पर नियमित कार्रवाई और संदिग्ध सप्लाई नेटवर्क की निगरानी से ही भारत-नेपाल सीमा को तस्करों का सुरक्षित ठिकाना बनने से रोका जा सकता है।

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