गाय-प्रेम और पर्यावरण को प्राथमिकता देने वाला आत्मनिर्भर भक्ति ग्राम पठारी में स्थापित....
आत्मनिर्भर गांव और गौ संरक्षण को दिया जा रहा बढ़ावापठारी में वैदिक जीवनशैली पर आधारित अनूठी पहल,
ब्रेकिंग ADN न्यूज़..

पठारी। अतुल्य भारत चेतना की टीम ने पठारी स्थित भक्ति ग्राम का भ्रमण कर वहां संचालित गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान संस्था प्रमुख नर्मदा दास ने बताया कि एक डॉक्टर ने श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन करने के बाद अपने जीवन की दिशा बदल दी और वैदिक संस्कृति तथा आत्मनिर्भर जीवनशैली को अपनाते हुए भक्ति ग्राम की स्थापना की। उन्होंने अतुल्य भारत चेतना के संवाददाता चेतराम साहू से बातचीत में बताया कि उनका उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के अनुरूप आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण करना है।
आत्मनिर्भर गांव बनाना है मुख्य उद्देश्य
नर्मदा दास ने बताया कि भक्ति ग्राम का मुख्य उद्देश्य ऐसा गांव विकसित करना है, जहां लोगों की मूलभूत आवश्यकताएं रोटी, कपड़ा और मकान की पूर्ति स्थानीय स्तर पर ही हो सके। उन्होंने कहा कि गांव का बाहरी संसाधनों पर निर्भरता जितनी कम होगी, समाज उतना ही आत्मनिर्भर और सशक्त बनेगा। उनका मानना है कि धर्म आधारित जीवनशैली के माध्यम से अर्थ और कर्म का संतुलन स्थापित किया जा सकता है, जिससे व्यक्ति और समाज दोनों का समग्र विकास संभव है।

वैदिक संस्कृति के संरक्षण का अनूठा प्रयास
संस्था प्रमुख ने बताया कि 60 बीघा भूमि में विकसित किए जा रहे भक्ति ग्राम को प्राचीन भारत की वैदिक संस्कृति के एक आदर्श मॉडल के रूप में तैयार किया जा रहा है। यहां सादा जीवन और उच्च विचार की भावना को प्राथमिकता देते हुए समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही व्यक्ति के नैतिक, मानसिक और शारीरिक विकास के लिए वैदिक परंपराओं के अनुरूप विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
आधुनिक संसाधनों के बजाय वैदिक पद्धति को अपनाया
भक्ति ग्राम की सबसे विशेष बात यह है कि यहां आधुनिक संसाधनों के उपयोग से परहेज किया गया है। गांव में निर्मित घर भी वैदिक पद्धति के अनुसार बनाए जा रहे हैं। इन घरों के निर्माण में पत्थर, बांस और लकड़ी की बल्लियों का उपयोग किया जा रहा है तथा मोटी दीवारों के कारण प्राकृतिक रूप से अनुकूल वातावरण बना रहता है। ग्रामीण परिवेश वाले इन घरों में आधुनिक विलासिता के साधनों के स्थान पर सादगी को महत्व दिया गया है। शाम होते ही यहां घरों में दीपक जलाकर पारंपरिक जीवनशैली का पालन किया जाता है।
पर्यावरण संरक्षण और गौ संवर्धन को दी जा रही प्राथमिकता
नर्मदा दास ने बताया कि भक्ति ग्राम में पर्यावरण संरक्षण और गौ संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। उनका कहना है कि यदि प्रत्येक गांव आत्मनिर्भर बन जाए तो लोगों को आवश्यक वस्तुओं के लिए बाहरी संसाधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उन्होंने हाल ही में गैस की उपलब्धता में आई समस्या का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में आत्मनिर्भर समाज को कठिनाइयों का सामना कम करना पड़ता है|

प्राचीन जीवनशैली अपनाने का दिया संदेश
उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय वैदिक पद्धति केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक संतुलित और सुखद जीवन जीने का मार्ग है। यदि समाज इस जीवनशैली को अपनाए तो आत्मनिर्भरता के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति भी संभव है। उनका मानना है कि आत्मनिर्भर बनकर व्यक्ति न केवल आर्थिक रूप से सशक्त होगा, बल्कि भक्ति, संस्कृति और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन भी जी सकेगा।






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