छत्तीसगढ़ यादव ठेठवार राजिम महासभा चुनाव में संतोष यदु की शानदार विजय....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से:-
रायपुर। छत्तीसगढ़ यादव ठेठवार समाज के राजिम महासभा चुनाव में संतोष यदु ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। चुनावी मुकाबले में उन्होंने 194 वोट हासिल किए और अपने प्रतिद्वंद्वी को 86 मतों के बड़े अंतर से मात दी। इस कामयाबी के बाद उन्होंने अपनी इस जीत का पूरा श्रेय समाज के हर एक सदस्य के अटूट विश्वास, सहयोग और स्नेह को दिया है।
संघर्षों से भरा प्रेरणादायक सफर: खेती-किसानी से लेकर समाज के शीर्ष नेतृत्व तक
संतोष यदु (पिता- स्वर्गीय निर्भय यदु) का जीवन कड़े संघर्ष, अटूट मेहनत और जनसेवा की एक मिसाल पेश करता है। उनका जन्म मुजगहन गांव में हुआ था, और महज 6 साल की उम्र में वे सलोनी गांव आ गए। एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले संतोष यदु ने अपने शुरुआती दिनों में दूध बेचने और खेती-किसानी जैसे कठिन कार्यों के जरिए जीवन की हर चुनौती का डटकर सामना किया।

पारिवारिक मजबूरियों के बावजूद उनके भीतर समाज के लिए कुछ कर गुजरने की भावना हमेशा जीवित रही। उन्होंने अपने गृह ग्राम सलोनी से ही जनसेवा के क्षेत्र में कदम रखा और कोलर पार क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत में लगातार तीन बार निर्विरोध सरपंच चुने गए।
पहला कार्यकाल: वर्ष 2009-10 से 2014-15 तक
दूसरा कार्यकाल: वर्ष 2015-16 से 2018-19 तक
पंचायत स्तर पर उनके बेहतरीन नेतृत्व और विकास कार्यों ने उन्हें जनता के बीच एक अलग पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में कदम रखते हुए यादव ठेठवार समाज रायपुर राज के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली और वर्तमान में भी वे इसी पद पर रहकर समाज की निष्ठापूर्वक सेवा कर रहे हैं।
सादगी और जनसंपर्क बना जीत की सबसे बड़ी ताकत
संतोष यदु का सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और हर किसी से आत्मीयता से मिलने का गुण उनकी सबसे बड़ी खूबी है। समाज के हर छोटे-बड़े व्यक्ति के सुख-दुख में हमेशा खड़े रहने की उनकी आदत ने उन्हें आम जनता के दिलों में खास जगह दिलाई है। राजिम महासभा के इस चुनाव में मिली 86 वोटों की बढ़त इस बात का प्रमाण है कि समाज के लोगों को उनके नेतृत्व पर पूरा भरोसा है।

जीत के बाद अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा, "यह किसी एक व्यक्ति की जीत नहीं है, बल्कि हमारे पूरे समाज की जीत है। मैं अपना यह मुकाम समाज के हर उस मतदाता को समर्पित करता हूं जिन्होंने मुझ पर अपना भरोसा जताया और आशीर्वाद दिया।"
उन्होंने आगे कहा कि चुनाव एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जिसमें हार-जीत चलती रहती है, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद सभी लोग हमारे अपने हैं। चुनाव में खड़े अन्य सभी प्रत्याशियों ने भी शानदार भागीदारी निभाई, जिसके लिए वे सभी का आभार जताते हैं। उनका मुख्य लक्ष्य अब आपसी मतभेदों को भुलाकर सभी को एकजुट करना और समाज को आगे बढ़ाना है।
समाज की एकता और सर्वांगीण विकास का संकल्प
कड़ी मेहनत, दूध बेचने और किसानी के दिनों से लेकर राजिम महासभा के अध्यक्ष पद तक का उनका यह सफर यह सिखाता है कि लगन और ईमानदारी से बड़ी से बड़ी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।
"चुनाव के दौरान प्रतिस्पर्धा, चुनाव के बाद केवल एकता" — यही उनका मूल मंत्र है। आने वाले समय में समाज की एकजुटता, युवाओं को आगे लाना और सामाजिक उत्थान के लिए मिलकर काम करना उनकी प्राथमिकता रहने वाली है।






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