ग्रामीण महिलाओं की आजीविका में नया रंग, रेडी-टू-ईट निर्माण से संवर रही जिंदगी...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
रायपुर। राज्य सरकार की ग्रामीणोन्मुखी नीतियों और दूरदर्शी योजनाओं के चलते छत्तीसगढ़ की महिलाओं के दिन बहुरने लगे हैं। ग्रामीण अंचलों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में महिला स्व-सहायता समूहों को पूरक पोषण आहार 'रेडी-टू-ईट' बनाने का जिम्मा सौंपा गया है, जो महिलाओं के लिए तरक्की का एक नया जरिया साबित हो रहा है।
डूमरमुड़ा की महिलाओं ने लिखी सफलता की इबारत -
रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा गांव की सरस्वती स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने अपनी मेहनत और लगन से आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल पेश की है। इस समूह की 10 महिलाएं मिलकर आधुनिक मशीनों के जरिए उच्च गुणवत्तायुक्त रेडी-टू-ईट पोषण आहार तैयार कर रही हैं। इस सामूहिक कारोबार से महिलाओं को हर महीने लगभग 50 हजार रुपये तक का मुनाफा मिल रहा है, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
समूह की सदस्य चम्पा चौहान बताती हैं कि 'बिहान' योजना से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। अप्रैल 2026 से उन्हें पोषण आहार निर्माण का कार्य मिला, जिसके बाद सभी महिलाएं पूरी तन्मयता से इस कार्य में जुटी हैं। अब महिलाएं अपनी छोटी-मोटी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि परिवार के भरण-पोषण में बराबर की हिस्सेदारी निभा रही हैं।
उत्पादन से लेकर वितरण तक खुद संभाल रही हैं कमान -
सरस्वती समूह की महिलाएं साफ-सुथरे तरीके से आधुनिक उपकरणों की मदद से पूरा काम संभालती हैं। गेहूं, चना और सोयाबीन जैसी जरूरी सामग्रियों की सफाई, भुनाई, पिसाई, छनाई और फिर तय अनुपात में मिक्सिंग कर आकर्षक पैकेजिंग तक की पूरी प्रक्रिया महिलाएं खुद करती हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों से मिलने वाली मांग के मुताबिक ही इस पौष्टिक आहार की आपूर्ति की जाती है। इस प्रक्रिया से महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण और व्यावसायिक प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिल रहा है।
जिलेभर में स्वरोजगार का विस्तार -
रायगढ़ जिले में संचालित कुल 2,709 आंगनबाड़ी केंद्रों तक पूरक पोषण आहार पहुंचाने के लिए चुनिंदा महिला समूहों को जोड़ा गया है। इन समूहों को 'पीएमएफएमई' योजना के तहत पूंजीगत सब्सिडी का लाभ भी मिल रहा है, जिससे वे अपने काम को और अधिक विस्तार दे पा रही हैं। शासन की यह पहल एक तीर से दो निशाने साध रही है—एक तरफ ग्रामीण महिलाओं को अपने ही गांव में पक्का रोजगार मिल रहा है, तो दूसरी तरफ नौनिहालों और माताओं तक बेहतरीन पोषण आहार समय पर पहुंच रहा है।






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