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मसूरी और चकराता में बारिश से मौसम सुहावना, पहाड़ी रास्तों पर खतरा....

Aug 11
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

देहरादून जिले में मंगलवार को मौसम ने अचानक करवट ली। सुबह से ही आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रही और पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बारिश हुई। चकराता, विकासनगर, कालसी, त्यूणी और मसूरी में रुक-रुककर बारिश दर्ज की गई, जबकि सदर, डोईवाला और ऋषिकेश क्षेत्र में दिनभर बादल छाए रहे। मौसम में बदलाव के साथ तापमान में भी कुछ नरमी देखने को मिली। जिले में मंगलवार को औसतन 2.78 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हल्की बारिश के बावजूद पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाओं ने परेशानी बढ़ा दी। मलबा और पत्थर सड़क पर आने के कारण तीन ग्रामीण मोटर मार्गों पर यातायात बाधित हो गया।


पहाड़ी इलाकों में बारिश से बढ़ी मुश्किल चकराता, कालसी और त्यूणी समेत अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान कई जगह पहाड़ियों से मलबा और पत्थर सड़क पर आ गए। इसके कारण ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाले तीन मोटर मार्ग बंद हो गए। सड़कें बंद होने से इन मार्गों से आवाजाही करने वाले ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीण मोटर मार्ग पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन हैं। इन मार्गों के बाधित होने से स्थानीय लोगों को बाजार, अस्पताल, स्कूल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में दिक्कत होती है। बारिश के बाद भूस्खलन की आशंका को देखते हुए स्थानीय स्तर पर भी सतर्कता बढ़ाई गई है।


सदर और मैदानी क्षेत्रों में छाए रहे बादल जिले के मैदानी हिस्सों में मंगलवार को बारिश नहीं हुई, लेकिन अधिकांश समय आसमान में बादल छाए रहे। सदर, डोईवाला और ऋषिकेश क्षेत्र में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आया। बादलों के कारण धूप का असर कम रहा और तापमान में भी अपेक्षाकृत नरमी रही। दिन का अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम में नमी बढ़ने के कारण लोगों को उमस से भी राहत महसूस हुई। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में बारिश की मात्रा कम रही।


भूस्खलन से ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बारिश के बाद भी भूस्खलन की घटनाएं सामने आना चिंता का विषय है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों की मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे मलबा और पत्थर सड़कों पर गिरने का खतरा बढ़ जाता है। मंगलवार को तीन ग्रामीण मोटर मार्गों के बंद होने से संबंधित क्षेत्रों में यातायात प्रभावित हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान ऐसे मार्गों पर भूस्खलन की समस्या अक्सर सामने आती है। सड़क बंद होने की स्थिति में ग्रामीणों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे समय और दूरी दोनों बढ़ जाते हैं।


सड़कों को खोलने की चुनौती ग्रामीण मोटर मार्गों पर मलबा आने के बाद सड़क को जल्द से जल्द यातायात के लिए खोलना जरूरी होता है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क खोलने के काम में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी चुनौती बनती हैं। मलबा हटाने के लिए जेसीबी और अन्य मशीनों की जरूरत पड़ती है। यदि बारिश दोबारा शुरू हो जाए तो राहत और सड़क खोलने का काम प्रभावित हो सकता है। ऐसे में संबंधित विभागों के लिए संवेदनशील मार्गों पर निगरानी रखना महत्वपूर्ण हो जाता है। बारिश ने बढ़ाई सतर्कता मौसम में बदलाव के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ-साथ सड़क मार्ग से यात्रा करने वालों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। हल्की बारिश के बाद भी भूस्खलन की घटनाएं सामने आने से यह स्पष्ट है कि पहाड़ी रास्तों पर खतरा बना हुआ है।


विशेष रूप से उन मार्गों पर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है, जहां पहले भी भूस्खलन की घटनाएं होती रही हैं। यात्रियों को सड़क पर मलबा या पत्थर दिखाई देने पर आगे बढ़ने से पहले स्थिति का आकलन करने की सलाह दी जाती है। बारिश से मौसम हुआ सुहावना बारिश ने जहां पहाड़ी क्षेत्रों में यातायात संबंधी परेशानी बढ़ाई, वहीं मौसम में ठंडक भी घोल दी। 27 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान और 23 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान के बीच लोगों को गर्मी से राहत मिली। मसूरी, चकराता और आसपास के क्षेत्रों में हल्की बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया। पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने बदले मौसम का आनंद भी लिया, हालांकि पहाड़ी सड़कों पर भूस्खलन की आशंका के कारण आवाजाही करने वालों को सावधानी बरतनी पड़ी। मौसम के इस बदलाव ने एक बार फिर पहाड़ी जिलों में बारिश के दौरान सड़क सुरक्षा और त्वरित मलबा हटाने की व्यवस्था की जरूरत को सामने ला दिया है। फिलहाल जिले में औसत 2.78 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है और तीन ग्रामीण मोटर मार्गों के बंद होने से स्थानीय स्तर पर आवागमन प्रभावित हुआ है।

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