राष्ट्रपति मुर्मू ने संशोधन विधेयक को दी मंजूरी: 'राष्ट्रगान' और 'राष्ट्रगीत' दोनों को मिला समान कानूनी संरक्षण.....
- ANIS LALA DANI

- 12 hours ago
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ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026’ को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के साथ अब ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ के दायरे का विस्तार हो गया है। नए प्रावधानों के तहत राष्ट्रगान के साथ-साथ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को भी कानून के संरक्षण में शामिल किया गया है। संसद के दोनों सदनों ने मॉनसून सत्र के दौरान इस संशोधन विधेयक को पारित किया था। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून प्रभावी हो गया है। संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और गरिमा को बनाए रखने के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को और मजबूत करना बताया जा रहा है।
संशोधित कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के गायन को रोकता है या ऐसी सभा में बाधा उत्पन्न करता है जहां राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत गाया जा रहा हो, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को अधिकतम तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं। अब तक ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ में मुख्य रूप से राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान से जुड़े अपमान के मामलों को शामिल किया गया था। नए संशोधन के बाद राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को भी इसमें शामिल कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे देश के राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत किया जा सकेगा।
वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत रहा है। इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था और यह देश के राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता प्राप्त है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने लोगों में देशभक्ति और एकजुटता की भावना को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।दक्षिण-एशियाई और प्रवासी संशोधन के बाद अब राष्ट्रगीत के सार्वजनिक गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसे रोकने की घटनाओं पर भी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होगा। हालांकि, कानून में यह प्रावधान विशेष रूप से जानबूझकर किए गए व्यवधान या अपमान की स्थिति पर लागू होगा।
सरकार की ओर से इस संशोधन को राष्ट्रीय सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का तर्क है कि देश के राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान नागरिकों की जिम्मेदारी है और इसके लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान जरूरी हैं। संसद में विधेयक पर चर्चा के दौरान राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा बनाए रखने और नागरिकों में सम्मान की भावना विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया गया था। सरकार ने कहा था कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों ही देश के गौरव और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े हुए हैं, इसलिए दोनों को समान कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, संशोधन के बाद प्रशासन और जांच एजेंसियों के पास ऐसे मामलों में कार्रवाई करने के लिए स्पष्ट आधार उपलब्ध होगा। हालांकि, किसी भी कार्रवाई के लिए यह साबित करना जरूरी होगा कि व्यवधान या रोक जानबूझकर की गई थी। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों और राष्ट्रीय सम्मान के बीच संतुलन बनाए रखना है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारों की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी का महत्व है, लेकिन राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े मामलों में कानून की अपनी भूमिका होती है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब संबंधित एजेंसियों को संशोधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने का अधिकार मिल गया है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि इस कानून का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है और इसके तहत दर्ज मामलों की कानूनी व्याख्या किस प्रकार सामने आती है। कुल मिलाकर, ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026’ के लागू होने से राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों को कानूनी संरक्षण का दायरा मिल गया है। सरकार इसे राष्ट्रीय एकता, सम्मान और देश की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है।




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