छत्तीसगढ़ चुनाव और एनडीए गठबंधन पर सियासी पारा गरम: विकास उपाध्याय का भाजपा पर बड़ा हमला, कहा– ‘सहयोगी दलों में ही बढ़ रही है दूरी’....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर: राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर मचे घमासान की चर्चा जोरों पर है। इस बीच, लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी-रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी द्वारा छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में चुनाव लड़ने के ऐलान को लेकर सियासत तेज हो गई है।

कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने इस घटनाक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार में साझीदार होने के बावजूद सहयोगी दलों का अलग-अलग राज्यों में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी करना, एनडीए के भीतर गंभीर मतभेदों और अंतर्विरोधों को उजागर करता है।
एनडीए गठबंधन पर उठ रहे गंभीर सवाल -
विकास उपाध्याय ने तीखे शब्दों में कहा कि एक तरफ एनडीए खुद को एकजुट होने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर इसके घटक दल अपनी अलग राजनीतिक जमीन तलाशने में जुटे हैं। “चिराग पासवान केंद्र सरकार में बीजेपी के प्रमुख सहयोगी हैं, लेकिन अब उनकी पार्टी छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों में भी चुनाव लड़ने का खुलकर ऐलान कर रही है। इससे साफ जाहिर है कि एनडीए के भीतर सीटों के बंटवारे और राजनीतिक रणनीति को लेकर भारी असमंजस और मतभेद की स्थिति बनी हुई है।”
उन्होंने आगे कहा कि कुछ समय पहले पंजाब विधानसभा चुनाव में भी एलजेपी (रामविलास) द्वारा अकेले उतरने की घोषणा सामने आई थी। अब छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी इसी तरह की रणनीति का सामने आना भाजपा के लिए असहज करने वाला और राजनीतिक रूप से बड़े सवाल खड़े करने वाला संकेत है।
भाजपा को स्पष्ट करनी चाहिए स्थिति -
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने भारतीय जनता पार्टी से सीधा सवाल करते हुए कहा कि पार्टी को देश की जनता के सामने अपने गठबंधन के भविष्य पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
“आज स्थिति यह है कि बीजेपी के अपने ही सहयोगी दल विभिन्न राज्यों में अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी तरफ, बीजेपी अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए केवल सतही बयानबाजी कर रही है। जनता अब यह पूछने लगी है कि आखिर एनडीए के घटक दलों को अपनी ही सहयोगी सरकार के साये में अलग राह क्यों तलाशनी पड़ रही है?” उन्होंने अंत में जोर देते हुए कहा कि चुनावों के नजदीक आते ही एनडीए के भीतर की दरारें अब खुलकर सामने आने लगी हैं, जिसका जवाब भाजपा को देना ही होगा।






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