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सीतापुर कांग्रेस कमेटी के दफ्तर को खाली कराने का आदेश जारी.....

Aug 5
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

सीतापुर: उत्तर प्रदेश के सीतापुर में शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यालय को लेकर नगर पालिका परिषद और कांग्रेस संगठन के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। नगर पालिका परिषद ने ऐतिहासिक घंटाघर भवन की पहली मंजिल पर संचालित शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यालय को खाली कराने का आदेश जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर भवन का कब्जा प्रशासन को सौंपने के निर्देश दिए हैं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर परिसर खाली नहीं किया गया तो नगर पालिका वैधानिक प्रक्रिया के तहत भवन को अपने कब्जे में लेगी और इस कार्रवाई में आने वाला पूरा खर्च भी संबंधित पक्ष से वसूला जाएगा।


नगर पालिका परिषद की अधिशासी अधिकारी एवं न्यायिक उप जिला अधिकारी सीमा सिंह द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि तानसेनगंज स्थित ऐतिहासिक घंटाघर भवन नजूल भूमि पर निर्मित है। जांच के दौरान यह पाया गया कि नजूल भूखंड संख्या 244/1 पर स्थित इस भवन की पहली मंजिल पर वर्षों से शहर कांग्रेस कमेटी का कार्यालय संचालित हो रहा है, लेकिन इसके समर्थन में कोई वैध आवंटन, पट्टा अथवा इकरारनामा उपलब्ध नहीं कराया गया। इसी आधार पर नजूल मैनुअल के नियम-74 के तहत कब्जा हटाने और अभिलेखों से कांग्रेस कमेटी का नाम बेदखल करने की कार्रवाई शुरू की गई।


नगर पालिका के आदेश के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस कमेटी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से प्रशासन के समक्ष दावा किया कि वर्ष 1972 से वह इस भवन का किरायेदार है और तत्कालीन सरकार द्वारा उसे यह परिसर आवंटित किया गया था। कांग्रेस का कहना था कि दशकों से कार्यालय का संचालन यहीं से किया जा रहा है, इसलिए उसे बेदखल करना उचित नहीं होगा। हालांकि नगर पालिका परिषद की जांच में कांग्रेस के इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी। प्रशासन ने अभिलेखागार और उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड की जांच कराई, जिसमें यह सामने आया कि कांग्रेस कमेटी द्वारा अंतिम बार 6 फरवरी 1971 को 320 रुपये किराया जमा किए जाने का रिकॉर्ड मिला। इसके बाद पिछले लगभग 55 वर्षों में किराया जमा करने का कोई प्रमाण सरकारी अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है। साथ ही कांग्रेस की ओर से कोई वैध आवंटन पत्र, पट्टा दस्तावेज या अनुबंध भी प्रस्तुत नहीं किया जा सका।


प्रशासन का कहना है कि सरकारी नजूल भूमि पर किसी भी संस्था या व्यक्ति का कब्जा तभी वैध माना जा सकता है जब उसके पास संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हों और निर्धारित नियमों के अनुसार किराया अथवा अन्य देय राशि का भुगतान किया जाता रहा हो। ऐसे में रिकॉर्ड के अभाव में कब्जे को वैध नहीं माना जा सकता। नगर पालिका परिषद ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि कांग्रेस कमेटी को 15 दिनों का अंतिम अवसर दिया गया है। यदि इस अवधि के भीतर परिसर स्वेच्छा से खाली नहीं किया गया तो प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में भवन को खाली कराकर नगर पालिका अपने कब्जे में लेगी। साथ ही कब्जा हटाने की पूरी कार्रवाई का खर्च भी नियमानुसार संबंधित पक्ष से वसूला जाएगा।


इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस समर्थकों का मानना है कि यह निर्णय राजनीतिक कारणों से लिया गया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई केवल उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और नजूल नियमों के आधार पर की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी संपत्तियों का संरक्षण और उनका नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। फिलहाल शहर कांग्रेस कमेटी के पास आदेश के खिलाफ कानूनी विकल्प मौजूद हैं। यदि निर्धारित अवधि में राहत नहीं मिलती या कोई न्यायिक आदेश प्राप्त नहीं होता, तो नगर पालिका परिषद प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए ऐतिहासिक घंटाघर भवन की पहली मंजिल का कब्जा अपने हाथ में ले सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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