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मंडी में फिर उछले प्याज के दाम, औसत कीमत 4,400 रुपये क्विंटल पहुंची...

Sep 3
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

नासिक :- प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों के बावजूद बाजार में स्थिरता नहीं आ पाई है। महाराष्ट्र की प्रमुख लासलगांव प्याज मंडी में थोक कीमतों में एक बार फिर तेजी दर्ज की गई है। पिछले सप्ताह कीमतों में गिरावट आने के बाद अब प्याज के औसत दाम बढ़कर करीब 4,400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने एक बार फिर सरकार और बाजार दोनों के लिए चिंता बढ़ा दी है। केंद्र सरकार लगातार प्याज की आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए कई उपाय कर रही है, लेकिन मांग और सप्लाई के बीच संतुलन अभी भी पूरी तरह कायम नहीं हो पाया है।


लासलगांव मंडी को देश की सबसे बड़ी प्याज मंडियों में गिना जाता है। यहां की कीमतों का असर देश के कई हिस्सों के बाजारों पर पड़ता है। ऐसे में यहां प्याज के दाम बढ़ना खुदरा बाजार में भी कीमतों पर दबाव बढ़ा सकता है। जानकारी के अनुसार, पिछले सप्ताह लासलगांव मंडी में प्याज की कीमतों में करीब 450 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई थी। लेकिन इसके बाद बाजार में फिर तेजी देखने को मिली और औसत कीमतें दोबारा बढ़ गईं।


प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने अपने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारना शुरू किया है। सरकार ने प्याज की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नेफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) के माध्यम से कई शहरों में प्याज की बिक्री शुरू की है। दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बफर स्टॉक का प्याज सब्सिडी वाली दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। दिल्ली में ग्राहकों को 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज उपलब्ध कराने का अभियान भी चलाया जा रहा है।


सरकार का उद्देश्य है कि बाजार में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और अचानक बढ़ने वाली कीमतों से आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। इसके लिए सरकारी एजेंसियां लगातार बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, लासलगांव जैसी बड़ी मंडी में कीमतों का दोबारा बढ़ना यह संकेत देता है कि बाजार में आपूर्ति और मांग का संतुलन अभी भी कमजोर बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्याज की कीमतों पर मौसम, उत्पादन, भंडारण क्षमता और बाजार की मांग का सीधा असर पड़ता है।


केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए बफर स्टॉक तैयार करने के उद्देश्य से 2 लाख टन रबी प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था। बताया जा रहा है कि इसमें से अब तक करीब 1.21 लाख टन प्याज की खरीद की जा चुकी है। रबी सीजन का प्याज देश में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसका इस्तेमाल लंबे समय तक भंडारण के लिए किया जाता है। सरकार इसी स्टॉक का उपयोग कीमतों में अचानक बढ़ोतरी के समय बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए करती है। किसानों और व्यापारियों के अनुसार, प्याज की कीमतों में तेजी और गिरावट दोनों का असर उत्पादन और बाजार व्यवस्था पर पड़ता है।


जहां अधिक कीमत मिलने से किसानों को फायदा होता है, वहीं उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बढ़ जाता है। खुदरा बाजार में प्याज की कीमतें बढ़ने का सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ता है। रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाली इस सब्जी के दाम बढ़ने से घरेलू खर्च प्रभावित होता है। सरकार की कोशिश है कि किसानों को उचित मूल्य भी मिले और उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत भी मिले। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए बफर स्टॉक और सब्सिडी बिक्री जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।


विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सरकारी स्टॉक जारी करने से लंबे समय तक कीमतों को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। इसके लिए उत्पादन, भंडारण और वितरण व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। फिलहाल केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां प्याज बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में कीमतों का रुख उत्पादन और आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगा। लासलगांव मंडी में बढ़े दामों ने एक बार फिर प्याज की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि सरकार के कदम बाजार में कितनी जल्दी स्थिरता ला पाते हैं।

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