छत्तीसगढ़ में पर्यटन और ग्रामीण सशक्तिकरण की नई लहर...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-
छत्तीसगढ़ अपनी नैसर्गिक विरासत, पहाड़ों, घने जंगलों, जलप्रपातों और समृद्ध आदिवासी संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में एक विशिष्ट पहचान रखता है। राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य इसी प्राकृतिक विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि से देश-दुनिया को परिचित कराना है। बस्तर का मनमोहक वन क्षेत्र और यहां का अतिथि सत्कार आज पर्यटकों को तेजी से अपनी ओर खींच रहा है।
जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे नीति और चेन्दरू पुरस्कार की शुरुआत -
छत्तीसगढ़ माटी की खुशबू और ग्रामीण सौंदर्य के दम पर वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर उभरने के लिए तैयार है। नई औद्योगिक नीति (2024-2030) के तहत पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है। जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए विशेष 'छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति' तैयार की गई है। इसके साथ ही ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की गई है। यह त्रिआयामी मॉडल गांवों में रोजगार और आजीविका के नए रास्ते खोलेगा।
बस्तर का विश्व प्रसिद्ध दशहरा और पर्यटन का बढ़ता दायरा -
मौसम बदलने के साथ ही यहां के हरे-भरे जंगल और पहाड़ पर्यटकों का मन मोह रहे हैं। बस्तर का 75 दिवसीय दशहरा महोत्सव देश-विदेश के सैलानियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। नवरात्रि, दशहरा और दीपावली के अवसरों पर यहां पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जो राज्य के पर्यटन क्षेत्र की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
'टाइगर बॉय' चेन्दरू मंडावी की अनूठी विरासत -
बस्तर के बालक चेन्दरू मंडावी की बाघ ‘टेंबू’ के साथ दोस्ती ने कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के सहज ग्रामीण जीवन का डंका बजाया था। उन्हीं की स्मृति में शुरू किए गए 'चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार' के तहत लोककला, हस्तशिल्प और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में योगदान देने वाले जमीनी नायकों या संस्थाओं को 1 लाख रुपये नकद और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा। विजेताओं का चयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की ज्यूरी द्वारा किया जाएगा और उन्हें राज्योत्सव के मंच पर सम्मानित किया जाएगा।
होमस्टे से गांवों की संस्कृति से रूबरू होंगे पर्यटक -
नई होमस्टे नीति के माध्यम से पर्यटक अब महंगे होटलों के बजाय गांवों में पारंपरिक घरों का अनुभव ले सकेंगे। इससे पर्यटकों को स्थानीय खान-पान, लोककला, और जनजातीय जीवनशैली को नजदीक से जानने का मौका मिलेगा। इस नीति के तहत मकानों के उन्नयन के लिए वित्तीय सहायता और संचालकों को आतिथ्य एवं स्वच्छता का प्रशिक्षण देने का प्रावधान है, जिससे महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
उद्योग का दर्जा मिलने से पर्यटन क्षेत्र में बहार -
छत्तीसगढ़ में पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने से न्यूनतम पूंजी निवेश पर विभिन्न रियायतें और सुविधाएं मिल रही हैं। सड़क संपर्क, आवासीय सुविधाओं और पर्यटक सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही, होटल कंपनियों द्वारा निवेश की इच्छा जताए जाने से पर्यटन अधोसंरचना मजबूत होगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
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